मकान खाली कराने को लेकर विवाद, तीन पर मारपीट का आरोप

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ताला खुलवाने पहुंचे व्यक्ति के साथ लात-घूंसों और चप्पल से मारपीट का आरोप, धमकी देने की भी शिकायत हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। कोतवाली थाना क्षेत्र के सातवर्गंज में मकान खाली कराने को लेकर हुए विवाद में मारपीट का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता अजय कृष्ण सिंह यादव की तहरीर पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 352 और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता का एक मकान सातवर्गंज, कोतवाली में स्थित है। मकान के एक हिस्से में किरायेदार सतना सिंह टेंट हाउस चलाते हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मकान खाली कराने और कब्जा दिलाने को लेकर न्यायालय में वाद भी दाखिल किया गया है।
ताला बंद मिलने पर पहुंचे थे मकान पर
तहरीर के मुताबिक 18 सितंबर को उक्त मकान में बिना किसी न्यायिक या प्रशासनिक आदेश के ताला बंद कर दिया गया। इसके बाद 19 सितंबर 2026 को सुबह करीब 10:30 बजे शिकायतकर्ता मकान पर पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि त्रिशा सिंह और गौरव कृष्ण सिंह यादव ने उनके साथ तथा किरायेदार सतना सिंह के साथ लात-घूंसों और चप्पल से मारपीट की। तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुष्पा सिंह मारपीट के लिए उकसा रही थीं। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव किया।
घटना का वीडियो रिकॉर्ड होने का दावा
एफआईआर में शिकायतकर्ता ने कहा है कि घटना के दौरान हुई मारपीट की पूरी घटना वीडियो में रिकॉर्ड हुई है। मौके पर मौजूद कुछ लोगों के नाम भी तहरीर में गवाह के तौर पर बताए गए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना के दिन उन्होंने और किरायेदार सतना सिंह ने जिला अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों की ओर से जान से मारने और हाथ-पैर काटने की धमकी भी दी गई। शिकायतकर्ता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर 25 सितंबर 2026 को मुकदमा दर्ज किया। एफआईआर में त्रिशा सिंह, गौरव कृष्ण सिंह यादव और पुष्पा सिंह को नामजद किया गया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक नरेंद्र विक्रम सिंह को सौंपी गई है।
पुलिस के स्तर से मामले की जांच की जा रही है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि विवेचना के दौरान होने वाले साक्ष्यों और बयानों के आधार पर होगी।

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