
शिकायतकर्ता का आरोप- बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के जमीन के दस्तावेजों में कराया गया नाम दर्ज, जांच शुरू
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। कोतवाली थाना क्षेत्र में जमीन के दस्तावेजों में कथित रूप से फर्जी तरीके से नाम दर्ज कराने के मामले में पुलिस ने कंप्यूटर ऑपरेटर समेत दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के बाद की गई शिकायत के आधार पर हुई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 338 और 336(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर 25 सितंबर 2026 की रात 9:16 बजे दर्ज की गई।
एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता विमला देवी पत्नी सुनील यादव ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 13 अक्तूबर 2015 को ग्राम सुरसती, तहसील सदर, आजमगढ़ स्थित गाटा संख्या 213 की जमीन खरीदी थी। शिकायत में कहा गया है कि जमीन का रकबा 42 कड़ी था और खरीद के बाद उसका नामांतरण भी हो गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में देवगांव थाना क्षेत्र के निवासी अजय यादव ने तहसील सदर के कंप्यूटर ऑपरेटर विवेक पाठक से कथित रूप से मिलीभगत कर उक्त जमीन के अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करा लिया। आरोप है कि इसके लिए एक लाख रुपये लेकर फर्जी तरीके से इंद्राज किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नाम दर्ज कराने के लिए किसी सक्षम अधिकारी का आदेश नहीं था।
राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट में भी फर्जी इंद्राज का उल्लेख
शिकायतकर्ता के अनुसार मामले की शिकायत जिलाधिकारी आजमगढ़ से भी की गई थी। एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक 11 नवंबर 2025 की राजस्व रिपोर्ट में अजय यादव पुत्र सुदर्शन यादव के नाम जमीन का इंद्राज फर्जी तरीके से किए जाने की बात स्पष्ट लिखी गई थी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पहले कोतवाली पुलिस को घटना की सूचना दी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री के माध्यम से शिकायत भेजी। इसके बाद न्यायालय की शरण ली गई। न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना कराने की मांग की गई थी।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, विवेचना शुरू
न्यायालय से प्राप्त आदेश के आधार पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में विवेचना अधिकारी के रूप में निरीक्षक/उप निरीक्षक चंद्र प्रकाश कश्यप का नाम दर्ज है।
पुलिस के रिकॉर्ड में आरोपी के रूप में कंप्यूटर ऑपरेटर विवेक पाठक और अजय यादव का नाम दर्ज है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस विवेचना के बाद ही उनकी पुष्टि हो सकेगी।