अभिलेखों में अनियमितता मिलने पर मदरसा जामिया नूरुल उलूम की मान्यता निलंबित

आजमगढ़ आजमगढ़ खास खबर आजमगढ़ ग्रामीण


भूमि-भवन के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के आरोपों की जांच में सामने आईं कई विसंगतियां, 1997 के कथित दानपत्र की वैधता पर भी सवाल
आजमगढ़। मदरसा जामिया नूरुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता से संबंधित भूमि और भवन के अभिलेखों में अनियमितता और कथित फर्जीवाड़े की शिकायत की जांच के बाद मदरसा शिक्षा परिषद ने बड़ी कार्रवाई की है। रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बृहस्पतिवार को मदरसे की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।


मदरसे की मान्यता से जुड़े भूमि और भवन के अभिलेखों में अनियमितता की शिकायत हाजी अली इमाम ने की थी। शिकायत पर रजिस्ट्रार एवं निरीक्षक अंजना सिरोही ने मदरसा प्रबंधन को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण के साथ मूल दानपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। प्रबंधन की ओर से दिए गए जवाब को विभाग ने संतोषजनक नहीं माना।


1997 के दानपत्र में जिले के नाम को लेकर सवाल
जांच के दौरान मदरसे की मान्यता के लिए प्रस्तुत कथित दानपत्र भी सवालों के घेरे में आया। यह दानपत्र 20 जून 1997 का बताया गया है। इसमें जमीन का स्थान तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद आजमगढ़ अंकित है। विभागीय आदेश के अनुसार, वर्ष 1988 में मऊ जनपद का गठन हो चुका था और मोहम्मदाबाद गोहना मऊ जिले का हिस्सा था। ऐसे में वर्ष 1997 के दस्तावेज में आजमगढ़ जनपद का उल्लेख किए जाने को जांच में गंभीर विसंगति माना गया।


खसरा अभिलेखों में मदरसे का उल्लेख नहीं
जांच में फसली वर्ष 1408 से 1412 यानी वर्ष 1998 से 2004 तक के खसरा अभिलेखों को भी देखा गया। विभाग के अनुसार, संबंधित भूमि पर इन अभिलेखों में किसी मदरसे अथवा शैक्षणिक संस्था के संचालन का उल्लेख नहीं मिला। विभाग का तर्क है कि यदि उस अवधि में मदरसा संचालित हो रहा था तो उसका विवरण राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना चाहिए था।


दानपत्र में प्रबंधक के नाम को लेकर भी विसंगति
जांच में कथित दानपत्र में दर्ज प्रबंधक के नाम को लेकर भी सवाल उठे हैं। विभागीय जांच के मुताबिक जिस समय यह दानपत्र निष्पादित होने का दावा किया गया, उस समय मदरसे के वैध प्रबंधक जहीन अहमद थे, जबकि कथित दानपत्र में निहाल अहमद को प्रबंधक दर्शाया गया है। यह विसंगति सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसायटी एवं चिट्स कार्यालय से प्राप्त अभिलेखों में सामने आने की बात आदेश में कही गई है।


10 रुपये के स्टांप पर दानपत्र होने पर सवाल
विभाग ने कथित दानपत्र की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। आदेश के अनुसार अचल संपत्ति के दान के लिए पंजीकरण आवश्यक है, जबकि प्रस्तुत दानपत्र अपंजीकृत है और मात्र 10 रुपये के स्टांप पर निष्पादित दिखाया गया है। इसके नोटरीकरण तथा पंजीकरण से संबंधित विवरणों को लेकर भी विभाग ने संदेह व्यक्त किया है।


2013 की रजिस्ट्री ने बढ़ाया संदेह
जांच में वर्ष 2013 में मदरसे के पक्ष में कराई गई भूमि की रजिस्ट्री भी महत्वपूर्ण मानी गई। इसमें पूर्व में किसी अनुबंध या दान किए जाने का उल्लेख नहीं होने की बात सामने आई है। विभाग के अनुसार यह तथ्य वर्ष 1997 के कथित दानपत्र की सत्यता पर और सवाल खड़े करता है।


मान्यता के समय दिए गए भूमि अभिलेख भी सवालों में
रजिस्ट्रार अंजना सिरोही के आदेश के अनुसार जांच रिपोर्ट में मदरसे की मान्यता के समय प्रस्तुत भूमि स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। वर्ष 2013 के पंजीकृत बैनामे और वर्ष 2017 में पोर्टल लॉकिंग की प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत भूमि संबंधी अभिलेखों को लेकर भी जांच में सवाल सामने आए।


जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ विभाग
परिषद की ओर से मदरसा प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के कई अवसर दिए गए। हालांकि, आदेश के अनुसार प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद रजिस्ट्रार ने मदरसा जामिया नूरुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *