डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 26.70 लाख की ठगी, साइबर अपराधी गिरफ्तार

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खुद को सीआईओ अधिकारी बताकर खाते में गलत लेनदेन और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने का भय दिखाया था, दो मोबाइल और 2,070 रुपये बरामद
आजमगढ़। डिजिटल अरेस्ट कर 26.70 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक शातिर साइबर अपराधी को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को अधिकारी बताकर लोगों को डराता था और मुकदमे से बचाने के नाम पर उनके खातों से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन, सिम कार्ड और 2,070 रुपये नकद बरामद किए हैं।


पुलिस के अनुसार, पीड़ित को विभिन्न मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल की गई। कॉल करने वालों ने खुद को सीआईओ अधिकारी बताते हुए उसके खाते से गलत लेनदेन होने की बात कही। इसके साथ ही पीड़ित के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने का भय दिखाकर उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। गिरफ्तारी से बचाने का झांसा देकर उससे कुल 26 लाख 70 हजार रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।


मामले में साइबर क्राइम थाना आजमगढ़ में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को लखनऊ निवासी जहांगीर आलम (27) पुत्र मो. रईस की संलिप्तता के बारे में जानकारी मिली। पुलिस टीम ने लखनऊ पहुंचकर आरोपी को पकड़ा और पूछताछ व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटना में उसकी संलिप्तता प्रमाणित होने पर 20 अगस्त को सुबह 11:35 बजे पुलिस अभिरक्षा में लिया।
सहयोगियों के साथ मिलकर करता था ठगी


पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर विभिन्न मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल करता था। खुद को पुलिस या अधिकारी बताकर पीड़ितों को मुकदमे और गिरफ्तारी का भय दिखाता और डिजिटल अरेस्ट करने के बाद रकम ट्रांसफर करा लेता था। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है।


कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन, अपर पुलिस अधीक्षक यातायात पंकज श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम आस्था जायसवाल के मार्गदर्शन में की गई।

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