
पराली जलाने से होने वाले नुकसान और दंड की जानकारी देकर फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने की अपील
श्री अन्न की खेती, सहफसली खेती और एफपीओ से जुड़ने के लिए किया प्रेरित
आजमगढ़। धान और गन्ने की पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा में जनपद स्तरीय किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि निदेशक उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी आजमगढ़ के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा आजमगढ़ के उपाध्यक्ष सत्येंद्र राय ने किसानों से पराली न जलाने की अपील की। उन्होंने मोटे अनाज यानी श्री अन्न की खेती को बढ़ावा देने और इसके महत्व को समझाते हुए किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. रणधीर नायक ने मशरूम की खेती, फसल प्रबंधन और पराली व गन्ने की पत्ती जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी दी। किसानों को इसके लिए निर्धारित दंड के बारे में भी बताया गया।
उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने विभागीय योजनाओं में किसानों को मिलने वाले अनुदान की जानकारी दी। उन्होंने वेस्ट डी-कंपोजर के प्रयोग से फसल अवशेष को खेत में सड़ाकर खाद के रूप में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। साथ ही सहफसली खेती, दलहनी और तिलहनी फसलों को अपनाने तथा एफपीओ के माध्यम से कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में फसल अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को यंत्रों के उपयोग की जानकारी देने के साथ वित्तीय वर्ष 2025-26 में ई-लॉटरी से चयनित किसान को मुख्य अतिथि ने कृषि यंत्र की चाबी भी सौंपी।
इसी अवसर पर प्रत्येक माह के तीसरे बुधवार को आयोजित होने वाले किसान दिवस का भी आयोजन किया गया। कृषि एवं संबद्ध विभागों ने स्टॉल लगाकर किसानों को योजनाओं की जानकारी दी और मौके पर लाभान्वित किया।
कार्यक्रम में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी, भूमि संरक्षण अधिकारी हरिराज सिंह, कृषि रक्षा अधिकारी हिमांचल सोनकर, मत्स्य विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक सहित कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के अध्यक्ष, वैज्ञानिक और विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।