
बेटे को नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप, फर्जी कागजात तैयार कर कथित तौर पर गायब कराने की शिकायत, न्यायालय के आदेश पर तहबरपुर थाने में दर्ज हुई एफआईआर
आजमगढ़। पुलिस विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र और फोटो तैयार कर युवक से कथित तौर पर धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता उर्मिला देवी ने अपनी बहू समेत चार लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस में नौकरी लगवाने का झांसा देकर उनके बेटे से रुपये लिए गए और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे गुमराह किया गया। शिकायत में युवक को कथित तौर पर गायब कराने का भी आरोप लगाया गया है। न्यायालय के आदेश के बाद तहबरपुर थाने में चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
शादी के बाद बेटे को अपने घर ले गए, फिर संपर्क हुआ बंद
एफआईआर में शिकायतकर्ता उर्मिला देवी, पत्नी सत्यराम, निवासी जमुआ भोरांव, बिलरियागंज ने बताया है कि उनके बेटे राम प्रताप की शादी 24 मई 2019 को पूजा सरोज पुत्री बाबूराम सरोज, निवासी जमनपुर, तहबरपुर के साथ हुई थी। शिकायत के अनुसार शादी के कुछ दिन बाद पूजा के माता-पिता उसके बेटे को अपने घर ले गए। वहां वह घर की देखरेख और अन्य काम करता था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बीते करीब तीन-चार वर्षों से वह अपने बेटे से मुलाकात नहीं कर सकीं। इसी दौरान उन्हें कथित तौर पर पता चला कि बहू पूजा सरोज ने उनके बेटे को पुलिस विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया था और इसी नाम पर रुपये लिए जाते रहे।
फर्जी नियुक्ति पत्र और फोटो तैयार करने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि पूजा सरोज ने पुलिस विभाग में नौकरी का फर्जी दस्तावेज दिखाकर उनके बेटे को विश्वास में लिया। आरोप है कि नौकरी लगवाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र और फोटो तैयार किए गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक इस बहाने उसके बेटे से रकम भी ली जाती रही। मामले में पूजा सरोज की बहन आरती सरोज, पिता बाबूराम सरोज और मां राधिका को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित धोखाधड़ी की इस पूरी प्रक्रिया में चारों की भूमिका रही।
‘नौकरी के नाम पर लिया पैसा, फिर बेटे को गायब करा दिया’
एफआईआर में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नौकरी के नाम पर उसके बेटे के साथ धोखाधड़ी करने के बाद उसे कथित तौर पर कहीं गायब करा दिया गया। इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच का विषय है। एफआईआर में दर्ज आरोपों के आधार पर पुलिस ने विवेचना शुरू की है।
बिलरियागंज थाने से लेकर एसएसपी तक लगाई गुहार
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने घटना की जानकारी बिलरियागंज थाने में दी थी, लेकिन वहां मामला तहबरपुर थाना क्षेत्र का होने की बात कहते हुए कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ से भी शिकायत की। वहां से भी तत्काल कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद तहबरपुर थाना पुलिस को उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
तीन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
तहबरपुर थाने में 26 अगस्त 2026 को एफआईआर संख्या 0138 दर्ज की गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 138 और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।
अंबिका प्रसाद साहनी करेंगे विवेचना
मुकदमा दर्ज होने के बाद मामले की जांच उपनिरीक्षक/वरिष्ठ उपनिरीक्षक अंबिका प्रसाद साहनी को सौंपी गई है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित फर्जी नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेजों के साथ रुपये के लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी।