
भाव गिरने पर अनुदान से लेकर भंडारण और बीज पर मिलेगी छूट, 15 लाख से अधिक किसानों को लाभ
आजमगढ़ । योगी सरकार ने आलू उत्पादक किसानों को बाजार भाव में गिरावट, भंडारण लागत और महंगे बीज से राहत देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में तीन महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। उद्यान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को उद्यान भवन में योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए ऑनलाइन पोर्टल potato.uphorticulture.in का शुभारंभ किया।
भाव गिरने पर मिलेगा अनुदान
आलू की अधिक पैदावार के कारण बाजार भाव गिरने पर किसानों को राहत देने के लिए 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की गई है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि रखी गई है। किसानों को निर्धारित उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत अथवा उत्पादन लागत और बिक्री दर के अंतर में से जो राशि कम होगी, उतनी धनराशि अनुदान के रूप में दी जाएगी।
एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर और प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल आलू पर अनुदान मिलेगा। योजना से करीब 12 से 14 लाख किसानों के लाभान्वित होने का अनुमान है। आवेदन ऑनलाइन होगा और पात्र किसानों के खाते में आधार-सीडेड डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जाएगी।
शीतगृह में आलू रखने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की छूट
निजी शीतगृहों में आलू भंडारण करने वाले किसानों को भी राहत दी गई है। प्रदेश के 2363 निजी शीतगृहों में करीब 173.03 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है। भंडारण प्रभार में छूट के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना लागू की गई है। इसके तहत 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान मिलेगा। एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक का लाभ दिया जाएगा। इससे 15 लाख से अधिक किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
उन्नत बीज खरीदने पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक छूट
किसानों को नवीन और उच्च गुणवत्ता वाली आलू प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये की बीज विक्रय दर छूट योजना लागू की गई है। विभागीय आलू बीज खरीदने पर अधिकतम 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक की छूट मिलेगी। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी और 15 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिलेगा।
प्रमुख बातें
– 1000 करोड़ रुपये का भामाशाह भाव स्थिरता कोष।
– भाव गिरने पर पात्र किसानों को उत्पादन लागत के आधार पर अनुदान।
– शीतगृह भंडारण पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की छूट।
– प्रति किसान शीतगृह अनुदान की अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये।
– उन्नत आलू बीज पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक की छूट।
– योजनाओं का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य।
– अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी।
– तीनों योजनाओं से लाखों आलू उत्पादक किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की आय, हित और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि पोर्टल के माध्यम से योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी और सुगम बनाया गया है, ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा, उद्यान निदेशक बीपी राम समेत विभागीय अधिकारी और आलू उत्पादक किसान मौजूद रहे।