
24 गांवों की करीब 1152 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की खबर से किसानों में रोष, लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का ऐलान
आजमगढ़ । पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित गांवों में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में मंगलवार को विकासखंड पवई के गोखवल गांव में अंबेडकर प्रतिमा के पास किसान चौपाल आयोजित की गई। इसमें बड़ी संख्या में किसानों और मजदूरों ने हिस्सा लेकर प्रस्तावित अधिग्रहण का विरोध किया। किसानों ने दो टूक कहा कि उनकी जमीन उनके जीवन-यापन का मुख्य आधार है और परियोजना के नाम पर एक इंच जमीन भी नहीं देंगे।
चौपाल के दौरान किसानों ने “जमीन हमारी, कानून तुम्हारा नहीं चलेगा”, “जमीन लुटेरे कॉरपोरेट वापस जाओ” और “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। किसानों का कहना था कि वे पीढ़ियों से अपनी जमीन पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। जमीन छिनने की स्थिति में उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव ने कहा कि यूपीडा और शासन की ओर से 24 गांवों की करीब 1152 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इससे किसानों में भय और मानसिक तनाव का माहौल है। उन्होंने कहा कि शासन को भूमि अधिग्रहण कानून का पूरी तरह पालन करना चाहिए और किसानों की सहमति के बिना किसी परियोजना के लिए उनकी जमीन नहीं ली जानी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता राज शेखर ने आरोप लगाया कि गोखवल और आसपास के कई गांवों में पट्टाधारी किसानों की जमीन पहले भी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए ली गई थी, लेकिन कई किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि दोबारा जमीन अधिग्रहण की कोशिश ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर सकती है। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का फैसला वापस लेने की मांग की।
चौपाल में किसानों और मजदूरों ने कहा कि जमीन बचाने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे और किसी भी कीमत पर अपनी कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं होने देंगे।