
नारी शक्ति संस्थान के सावन उत्सव-2026 में सजी हरियाली, मेहंदी-चूड़ी और सावन सुंदरी प्रतियोगिता ने बांधा समां
आजमगढ़। सावन की हरियाली, लोकगीतों की मिठास और भारतीय संस्कृति की रंगीन छटा रविवार को नगर के अग्रवाल धर्मशाला में देखने को मिली। नारी शक्ति संस्थान की ओर से नारी शक्ति सावन उत्सव-2026 का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर सावन की खुशियों को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम में सावन सुंदरी, मेहंदी और चूड़ी प्रतियोगिता आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। परिसर को हरियाली से सजाया गया था। जैसे ही कजरी गीतों की स्वर लहरियां गूंजीं, महिलाएं सावन की मस्ती में झूम उठीं। ‘छोड़ काशी नगरिया न जइबे पिया, जिंदगी बितइबे पिया ना…’ और ‘हरे रामा भादो रैन अधियारी, बदरिया छाई हे हरि…’ जैसे पारंपरिक कजरी गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह सावनमय कर दिया।
संस्था की सचिव डॉ. पूनम तिवारी ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हमारी पारंपरिक लोक संस्कृति और कजरी गीत धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं। पहले गांव से लेकर शहर तक सावन के महीने में कजरी गीतों की गूंज सुनाई देती थी, लेकिन अब इनका चलन कम होता जा रहा है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और पारंपरिक उत्सवों का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। नारी शक्ति संस्थान आगे भी इस दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन करता रहेगा।
संस्थान की अध्यक्ष मंजू उपाध्याय ने कहा कि उत्सव जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करते हैं। बदलते परिवेश में कई पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर संस्थान निरंतर प्रयास कर रहा है, ताकि कजरी जैसे पारंपरिक लोकगीत और सावन के उत्सव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकें।
कार्यक्रम में डॉ. नेहा दुबे, रिंकी प्रशांत, पूनम यशपाल सिंह, अनुपमा तिवारी, अंशु अस्थाना और दीपशिखा पांडे सहित टीम के सदस्यों ने कजरी गीतों की प्रस्तुतियां दीं। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित महिलाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आगंतुकों के प्रति अध्यक्षीय संबोधन डॉ. प्रीति गुप्ता ने किया, जबकि स्वागत भाषण डॉ. नेहा दुबे ने दिया। कार्यक्रम का संचालन अंशु अस्थाना ने किया। इस अवसर पर नारी शक्ति संस्थान की संरक्षक, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सदस्यगण मौजूद रहीं।