
फोन के बाद पहुंचे डॉक्टर को कड़ी चेतावनी, प्रसव कक्ष और सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश
रिपोर्ट : शैलेश कुमार सिंह
बलरामपुर। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले की व्यवस्थाओं और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा सेवाओं की हकीकत जांचने के लिए सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा ने रविवार को पीएचसी सरायमीर और संजरपुर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान चिकित्सकों व कर्मचारियों की उपस्थिति, ओपीडी, साफ-सफाई, प्रसव कक्ष और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।
ड्यूटी से गायब मिले आयुर्वेदिक चिकित्सक
पीएचसी संजरपुर में निरीक्षण के दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सक केंद्र पर मौजूद नहीं मिले। सीएमओ के फोन करने के कुछ देर बाद वह स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। सीएमओ ने उन्हें कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य में ड्यूटी स्थल से अनुपस्थित मिलने पर गैरहाजिरी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सभी स्वास्थ्यकर्मियों को समय से ड्यूटी पर पहुंचने के निर्देश दिए गए।
प्रसव कक्ष की व्यवस्था पर जताई नाराजगी
संजरपुर पीएचसी के प्रसव कक्ष और सफाई व्यवस्था में सुधार की जरूरत मिली। सीएमओ ने चिकित्सक और एएनएम को प्रसव कक्ष की व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने, स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने और निर्धारित मानकों के अनुसार प्रसव सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरायमीर पीएचसी पर नवनियुक्त चिकित्सक आवास में आवश्यक व्यवस्थाएं करते मिले। उन्हें परिसर की सफाई और मरीजों के लिए बेहतर वातावरण बनाए रखने को कहा गया।
76 केंद्रों पर जन आरोग्य मेला, 2102 मरीज पहुंचे
जिले के 76 स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। 82 चिकित्सकों और 269 पैरामेडिकल कर्मचारियों ने सेवाएं दीं। कुल 2102 मरीजों का पंजीकरण हुआ। इनमें 944 महिलाएं, 840 पुरुष और 318 बच्चे शामिल रहे।
जांच में डायबिटीज के 326, पेट संबंधी 314, त्वचा रोग के 264, सांस संबंधी 177 और हाई ब्लड प्रेशर के 102 मरीज मिले। 109 गर्भवती महिलाओं और 108 कुपोषित बच्चों की भी पहचान हुई। इसके अलावा 33 लिवर, 25 एनीमिया और 10 टीबी के मरीज मिले।
मेले में 226 लोगों की कोविड-19 हेल्प डेस्क पर जांच हुई, जबकि 31 आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाए गए। गंभीर जरूरत वाले 12 मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर किया गया।
सीएमओ ने कहा कि ग्रामीणों को उनके नजदीक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। चिकित्सकों की समयबद्ध उपस्थिति, स्वच्छता और प्रसव सेवाओं की गुणवत्ता में किसी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।