
हजारों अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों याद में पेश की खिराज-ए-अकीदत, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
आजमगढ़। कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की याद में रविवार को आजमगढ़ में चेहल्लुम का पारंपरिक जुलूस पूरे धार्मिक आस्था, गम और इंसानियत के संदेश के साथ निकाला गया।
मदरसा बाग मीर पेटू से शुरू हुआ जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कर्बला मैदान पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग पर हजारों अकीदतमंद शामिल रहे और “या हुसैन” की सदाओं के बीच नौहा-ख्वानी, मातम और सीनाजनी कर शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई।

जुलूस पुरानी कोतवाली, मुख्य चौक, पुरानी सब्जी मंडी, कटरा सहित प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने जुलूस का स्वागत किया तथा जुलूस में शामिल लोगों के लिए पेयजल व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई।
मौलानाओं ने अपने संबोधन में कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत अन्याय और अत्याचार के खिलाफ इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।

जुलूस के दौरान दुलदुल आकर्षण का केंद्र रहा। उसे देखने के लिए सड़क किनारे बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मातमी धुनों और नौहों के बीच माहौल पूरी तरह गमगीन रहा और कई अकीदतमंद भावुक हो उठे।
चेहल्लुम के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। जुलूस मार्ग पर महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ पीएसी के जवान तैनात रहे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया तथा यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया गया।
आजमगढ़ के अलावा मुबारकपुर, बाराबंकी सहित अन्य जिलों से आई विभिन्न अंजुमनों और बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भी चेहल्लुम के जुलूस में सहभागिता कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।