
निजामाबाद से पांच बार विधायक रहे, सादगी और ईमानदारी की मिसाल माने जाते थे
आजमगढ़। जनपद की राजनीति के लिए बुधवार की रात एक दुखद खबर लेकर आई। निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता आलम बदी आज़मी का निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों, शुभचिंतकों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे जनपद की अपूरणीय क्षति बताया।
1996 में पहली बार बने थे विधायक
आलम बदी आज़मी का जन्म वर्ष 1936 में हुआ था। वे मूल रूप से बिंदवल, जयराजपुर (बिलरियागंज), आजमगढ़ के निवासी थे, जबकि शहर के माताबगंज स्थित अपने आवास पर परिवार के साथ रहते थे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने गोरखपुर में नौकरी भी की, लेकिन महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रेरित होकर समाजसेवा और राजनीति का रास्ता चुना।
वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वे कुल पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने में सफल रहे और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

मंत्री पद भी ठुकरा दिया था
साल 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मंत्री पद स्वीकार नहीं किया कि वे अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। उनकी इसी सोच ने उन्हें आम नेताओं से अलग पहचान दिलाई।
सादगी थी उनकी सबसे बड़ी पहचान
आलम बदी आज़मी का जीवन पूरी तरह सादगी से भरा था। साधारण कुर्ता-पायजामा, पैरों में चप्पल, कान में छोटी सुनने की मशीन और हाथ में साधारण कीपैड मोबाइल उनकी पहचान बन चुका था। वे बिना किसी तामझाम के लोगों के बीच पहुंचते थे और कई बार पैदल ही क्षेत्र का भ्रमण करते दिखाई देते थे। उनके घर आने वाले मेहमानों को छोटे कप में बिना दूध की चाय परोसी जाती थी। घर में कोई नौकर नहीं था। मेहमानों की सेवा उनके बेटे और पोते स्वयं करते थे। वे टीन शेड के नीचे बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते थे और सादगीपूर्ण जीवन को ही अपना आदर्श मानते थे।

ईमानदार राजनीति के लिए याद किए जाएंगे
आलम बदी आज़मी अपनी ईमानदारी और साफ-सुथरी राजनीति के लिए पूरे प्रदेश में चर्चित रहे। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और जीवनभर उसी सिद्धांत पर चलते रहे।
शोक की लहर
आलम बदी आज़मी के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनके निधन से आजमगढ़ ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिसकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल लंबे समय तक याद की जाएगी।