

शंभूपुर कांड के बाद दो मासूम बच्चियों की परवरिश की चिंता हुई दूर, एसपी डॉ. अनिल कुमार देंगे एक माह का वेतन; जिले के पुलिसकर्मी भी देंगे एक दिन की सैलरी
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। अहिरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुए हृदयविदारक हत्याकांड के बाद अनाथ हुईं दो मासूम बच्चियों के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने मानवीय पहल की है। एसपी ने दोनों बच्चियों को गोद लेते हुए उनकी पढ़ाई-लिखाई और सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से उठाने का फैसला किया है।
गुरुवार को मीडिया से बातचीत में एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि वह अपनी एक महीने की पूरी सैलरी बच्चियों के नाम देंगे। इसके साथ ही जिले के पुलिसकर्मी भी स्वैच्छिक रूप से अपनी एक दिन की सैलरी बच्चियों के भविष्य के लिए देंगे।

पुलिसकर्मियों की मदद से बनेगी एफडी
एसपी के अनुसार पुलिसकर्मियों से मिलने वाली राशि की एफडी कराई जाएगी। इसमें बच्चियों की दादी को नामिनी बनाया जाएगा, ताकि यह धनराशि भविष्य में दोनों बच्चियों की शिक्षा और जरूरतों के काम आ सके।
उन्होंने कहा कि घटना से प्रभावित परिवारों को केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रखा जाएगा। दोनों प्रभावित ब्राह्मण परिवारों को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी प्रयास किया जाएगा।
शौर्य की मौत को लेकर उठे सवालों पर एसपी ने दी सफाई
हत्याकांड में अरविंद के आठ वर्षीय बेटे शौर्य की गोली लगने से मौत को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। कुछ लोगों की ओर से यह सवाल उठाया गया था कि बच्चे को गोली पुलिस की ओर से लगी होगी।
एसपी डॉ. अनिल कुमार ने इन चर्चाओं पर पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्चे को करीब 7.30 सेंटीमीटर की दूरी से गोली लगी थी। पुलिस के अनुसार बच्चे को लगी गोली .32 बोर के कारतूस से चली थी, जबकि पुलिसकर्मियों के पास 9 एमएम की कारतूस होती है।

अरविंद के पास मिले 18 जिंदा कारतूस
एसपी ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान अरविंद के लोअर से 18 जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक शुरुआती तीन हत्याओं के दौरान अरविंद ने अपनी रिवॉल्वर से फायरिंग की थी। इसके बाद उसने दोबारा रिवॉल्वर लोड कर कमरे के भीतर से अपने बच्चे और पुलिस टीम पर फायरिंग की।
अरविंद के पास से टॉर्च, भांग की गोली, तंबाकू और गुटखा भी बरामद होने की जानकारी एसपी ने दी। पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
आठ घंटे तक बच्चों को बचाने की कोशिश
एसपी के अनुसार पुलिस के सामने सबसे पहली प्राथमिकता कमरे के भीतर मौजूद बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था। इसी वजह से पुलिस ने जल्दबाजी के बजाय धैर्य के साथ करीब आठ घंटे तक अरविंद को समझाने का प्रयास किया।
पुलिस की ओर से लगातार उसे कमरे से बाहर आने और बच्चों को सुरक्षित छोड़ने के लिए कहा जाता रहा। बाद में कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आने के बाद स्थिति गंभीर हो गई।
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल तीन पुलिसकर्मी कमरे के अंदर दाखिल हुए और ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
अब दो मासूमों के भविष्य की जिम्मेदारी एसपी की पहल पर
शंभूपुर की घटना ने दो मासूम बच्चियों को माता-पिता के साये से वंचित कर दिया। ऐसे में उनकी परवरिश और शिक्षा को लेकर परिवार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। एसपी की इस पहल से दोनों बच्चियों के भविष्य को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद जगी है।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि बच्चियों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को लेकर वह व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी निभाएंगे। वहीं जिले के पुलिसकर्मियों की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता को भी सुरक्षित निवेश के रूप में रखा जाएगा।