
80वें स्वतंत्रता दिवस पर डीएम ने किया ध्वजारोहण, वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के सामूहिक गायन से गूंजा कलेक्ट्रेट परिसर
आजमगढ़। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वजारोहण किया। इसके बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान का सामूहिक गायन हुआ। कार्यक्रम में कलेक्ट्रेट के अधिकारियों और कर्मचारियों ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।
आजमगढ़ के सेनानियों का रहा अप्रतिम योगदान
अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि देश के स्वाधीनता संग्राम में आजमगढ़ के नायकों और सेनानियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गांधीजी के असहयोग आंदोलन के आह्वान पर आजमगढ़ के स्थानीय दुकानदारों ने दुकानों से अंग्रेजी वस्त्र निकालकर जला दिए थे। यह घटना दर्शाती है कि देशहित उनके लिए रोजी-रोटी से भी बड़ा था। नमक सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1930 में महात्मा गांधी ने नमक कानून तोड़कर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। उस दौर में न मोबाइल फोन था, न इंटरनेट और न ही आज के आधुनिक संचार साधन। इसके बावजूद आंदोलन की खबर महज तीन दिन में आजमगढ़ पहुंच गई। कालीचौरा में सूर्यकांत सिंह सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने नमक कानून तोड़ा, नमक बनाया और कई दिनों तक स्थानीय स्तर पर तैयार नमक बाजार में बेचा। इस आंदोलन में भी आजमगढ़ के अनेक लोगों को जेल जाना पड़ा।

भारत छोड़ो आंदोलन में भी निभाई अहम भूमिका
जिलाधिकारी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भी आजमगढ़ के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत का डटकर मुकाबला किया और कई लोगों ने गोलियां खाकर अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने सूबेदार अहीर, रघुवर दयाल श्रीवास्तव, लालचंद तिवारी सहित अनेक सेनानियों के योगदान को याद किया। कहा कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं, आजादी की लड़ाई में इस मिट्टी के अनगिनत लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
सेनानियों के त्याग को हमेशा याद रखने की अपील
जिलाधिकारी ने कहा कि आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं और अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं तो इसके पीछे वीरों का त्याग, तपस्या, संघर्ष और बलिदान है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोया तो अनेक लोगों ने वर्षों जेल में बिताए। उन्होंने कहा कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी उनके त्याग और बलिदान की स्मृति जीवित रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता रखने की अपील की। कहा कि उनके परिवार के किसी सदस्य का कार्य किसी विभाग या पटल पर लंबित हो तो उसका सहजता और तत्काल निस्तारण किया जाए। उन्हें कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और न ही अनावश्यक परेशानी हो। यही स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
स्वतंत्रता सेनानियों और परिजनों को किया सम्मानित
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और बलिदान देने वाले वीरों एवं उनके परिजनों को जिलाधिकारी ने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में इनका अप्रतिम योगदान रहा है। शासकीय विधिक मामलों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के लिए दो अभियोजन अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया।
वंदे मातरम् की प्रस्तुति देने वाली छात्राएं पुरस्कृत
मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह ने भी स्वाधीनता संग्राम में प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिकारियों, सेनानियों और जननायकों के योगदान को रेखांकित किया तथा स्वतंत्रता के आदर्शों एवं मूल्यों के प्रति जागरूक किया।
इस अवसर पर जीजीआईसी आजमगढ़ की छात्राओं ने वाद्य यंत्रों की धुन के साथ राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। प्रस्तुति देने वाली छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन जिलाधिकारी न्यायालय के पेशकार विपुल सिंह ने किया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन संजय चावला, उप जिलाधिकारी प्रियंका सिंह, डिप्टी कलेक्टर अतुल आनंद, जिला सूचना अधिकारी डॉ. कुमार, अभिहीत अधिकारी खाद्य सुरक्षा सुशील मिश्र सहित कलेक्ट्रेट के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।