जमीन के बैनामे में फर्जी बैंक रसीद का आरोप, तीन के खिलाफ मुकदमा

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अतरौलिया में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, कब्जा कर पिलर गाड़ने का भी आरोप

आजमगढ़। जमीन के बैनामे में कथित फर्जी बैंक रसीद लगाने और दूसरे की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा करने के आरोप में अतरौलिया थाने में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 319(2), 318(2) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।


मामले में शिकायतकर्ता अरुण कुमार पुत्र स्वर्गीय हरिओम प्रसाद निवासी बढ़या, अतरौलिया, वर्तमान पता मऊ रोड लसधारी, आजमगढ़ हैं। एफआईआर के अनुसार नामजद आरोपियों में प्रियंका पत्नी रामनाथ, रुनझुन पत्नी स्वामीनाथ निवासी ऐदिलपुर, अतरौलिया तथा शोभनाथ शामिल हैं।


जमीन के हिस्से को लेकर विवाद
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि बढ़या पुलिस चौकी के पीछे सड़क तक करीब 101 फीट फ्रंट वाली 45 बिस्वा जमीन उसके और उसके भाइयों गोविंद, पंकज व प्रमोद के नाम पुश्तैनी जमीन है। आरोप है कि गोविंद और प्रमोद ने अपने हिस्से की जमीन में से 50 फीट 6 इंच फ्रंट वाला हिस्सा शोभनाथ सेठ को बेचने के लिए दिया था।
तहरीर के मुताबिक प्रियंका और रुनझुन ने 30 जून 2026 को 284 वर्ग मीटर जमीन का बैनामा कराया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान उनके हिस्से में भी आरसीसी पिलर गाड़ दिए गए, जबकि पंकज और अरुण ने शेष 50 फीट 6 इंच हिस्से में अपनी जमीन नहीं बेची थी।


यूनियन बैंक की पांच लाख की रसीद को बताया फर्जी
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जमीन के लेनदेन के दौरान यूनियन बैंक की पांच लाख रुपये की रसीद गोविंद की पत्नी ललिता के नाम से दी गई, जिसे उसने फर्जी बताया है। तहरीर में कहा गया है कि कथित रसीद पर बैंक की मुहर भी लगी थी, जबकि उसमें वास्तविक रूप से पैसा होने से इनकार किया गया है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके और उसके भाई की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा करने का प्रयास किया गया। तहरीर में करीब 200 ट्राली मिट्टी डलवाने और जमीन के हिस्से में मिट्टी डालकर कब्जे की स्थिति बनाने का भी आरोप लगाया गया है।


पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू
शिकायत के आधार पर अतरौलिया थाने में 11 अगस्त 2026 की शाम 7:51 बजे एफआईआर दर्ज की गई। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक सुरेंद्र कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अब जमीन के दस्तावेज, बैनामा, बैंक रसीद और कब्जे से संबंधित आरोपों की जांच करेगी। एफआईआर में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता की तहरीर पर आधारित हैं; आरोपों की पुष्टि विवेचना के बाद ही स्पष्ट होगी।

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