
1.80 करोड़ की जमीन का सौदा बताकर ली अग्रिम रकम, रजिस्ट्री की बात आई तो टालमटोल, रकम वापसी का चेक भी हुआ बाउंस
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर कथित फर्जी मुख्तार-ए-आम दिखाकर 6.10 लाख रुपये लेने के आरोप में कोतवाली पुलिस ने पिता-पुत्र के खिलाफ धोखाधड़ी समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने 1.80 करोड़ रुपये में जमीन का सौदा तय कर खुद को जमीन बेचने का अधिकार प्राप्त मुख्तार-ए-आम बताया और विश्वास में लेकर सत्येन कुमार उर्फ सत्येन से अग्रिम रकम हासिल कर ली। बाद में न जमीन की रजिस्ट्री कराई गई और न रकम वापस की गई। रकम लौटाने के लिए दिया गया चेक भी बैंक में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
कोतवाली में दर्ज एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता सत्येन कुमार उर्फ सत्येन, पुत्र छोटेलाल, निवासी 409 बस स्टाप, सिविल लाइंस, थाना कोतवाली, आजमगढ़ ने सुभाष चौबे पुत्र रमाकांत चौबे, निवासी ग्राम गम्भीरवन, थाना जहानागंज और उसके पुत्र रत्नेश मणि चतुर्वेदी, प्रोपराइटर चतुर्वेदी ब्रदर्स ईंट उद्योग, ग्राम गम्भीरवन के खिलाफ तहरीर दी थी।
1.80 करोड़ की जमीन का सौदा, 6.10 लाख अग्रिम
शिकायत के मुताबिक दोनों आरोपी पहले से सत्येन कुमार के संपर्क में थे और उसके कार्यालय व आवास पर आते-जाते थे। आरोप है कि 20 जून 2022 को दोनों उसके आवास एवं कार्यालय पर पहुंचे और ग्राम रौली, परगना निजामाबाद, तहसील सदर स्थित आराजी संख्या 489, रकबा 79 कड़ी तथा आराजी संख्या 533, रकबा 70 कड़ी की जमीन का खुद को मुख्तार-ए-आम बताया।
आरोपियों ने कथित मुख्तार-ए-आम/पावर ऑफ अटॉर्नी का दस्तावेज दिखाकर सत्येन को भरोसा दिलाया कि उन्हें उक्त जमीन बेचने का पूरा अधिकार प्राप्त है। शिकायत के अनुसार दस्तावेज की प्रति सत्येन को नहीं दी गई और आरोपी उसे अपने साथ वापस ले गए।
आरोपियों ने जमीन का सौदा 1.80 करोड़ रुपये में तय किया और अग्रिम राशि की मांग की। भरोसे में आकर सत्येन ने 20 जून 2022 को आरोपी रत्नेश मणि चतुर्वेदी के उद्यम बैंक खाते में 6 लाख रुपये ट्रांसफर किए तथा 10 हजार रुपये नकद दिए। इस तरह कुल 6.10 लाख रुपये आरोपियों को दिए गए।
करारनामे में भी रकम लेने की बात स्वीकारने का आरोप
एफआईआर के मुताबिक जब सत्येन ने जमीन की रजिस्ट्री के संबंध में जानकारी मांगी तो 22 जून 2022 को दोनों आरोपी फिर उसके आवास एवं कार्यालय पर पहुंचे। आरोप है कि वे अपने साथ एक लिखित करारनामा लेकर आए, जिस पर दोनों ने हस्ताक्षर किए। करारनामे में जमीन का बिक्री मूल्य 1.80 करोड़ रुपये और 6 लाख रुपये अग्रिम प्राप्त किए जाने की बात लिखे जाने का उल्लेख एफआईआर में है। इसके बावजूद आरोपियों ने न तो जमीन का बैनामा कराया और न ही अग्रिम रकम वापस की।
सत्येन का आरोप है कि उसने कई बार कथित मुख्तार-ए-आम/पावर ऑफ अटॉर्नी की प्रति मांगी, लेकिन आरोपियों ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया। इससे उसे संदेह हुआ कि दिखाया गया दस्तावेज फर्जी, कूटरचित अथवा वास्तविक अधिकार से रहित था और केवल रकम हासिल करने के उद्देश्य से दिखाया गया था।
रकम लौटाने का चेक भी बाउंस
रकम वापस मांगने पर आरोपियों ने टालमटोल की। बाद में 6.10 लाख रुपये वापस करने के लिए चेक दिए जाने का आरोप है। सत्येन ने जब चेक बैंक में लगाया तो वह Funds Insufficient के कारण अनादरित हो गया। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि मूल रकम चतुर्वेदी ब्रदर्स नामक ईंट निर्माण फर्म के खाते में प्राप्त हुई थी, जबकि चेक सुभाष चौबे के नाम से दिया गया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों की मंशा शुरू से ही बेईमानी और कपटपूर्ण थी तथा योजनाबद्ध तरीके से उसकी रकम हासिल की गई। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि सत्येन को बाद में समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के माध्यम से आरोपियों द्वारा इसी तरह के कथित कृत्यों की जानकारी हुई। संबंधित समाचार पत्रों की प्रतियां शिकायत के साथ संलग्न किए जाने का उल्लेख भी एफआईआर में है।
420, 467 और 468 में मुकदमा दर्ज
मामले में कोतवाली पुलिस ने 10 सितंबर 2026 को रात 10:40 बजे एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467 और 468 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले की विवेचना सौरभ त्रिपाठी, निरीक्षक/वरिष्ठ निरीक्षक को सौंपी गई है। पुलिस अब जमीन के दस्तावेज, कथित मुख्तार-ए-आम, करारनामा, बैंक खाते में हुए लेनदेन और चेक समेत शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी।