हरित परिसर और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ विश्वविद्यालय में हुआ सघन वृक्षारोपण अभियान
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय (मसुविवि) परिसर में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और हरित परिसर के निर्माण के उद्देश्य से शुक्रवार को “तमसा वन (मियावाकी पद्धति)” के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के तहत कम क्षेत्र में अधिक घनत्व के साथ देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण कर प्राकृतिक वन विकसित करने की शुरुआत की गई।
कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि मियावाकी पद्धति कम समय में घने और जैव विविधता से समृद्ध वन तैयार करने की वैज्ञानिक तकनीक है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से इस अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप देने का आह्वान किया।
कुलसचिव ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्वों के निर्वहन के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि “तमसा वन” भविष्य में विश्वविद्यालय की हरित पहचान बनेगा।

चरक वानस्पतिक उद्यान की संयोजिका डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि मियावाकी पद्धति जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित तकनीक है, जिसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधों का सघन रोपण कर कम समय में प्राकृतिक वन तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह वन विद्यार्थियों के पर्यावरणीय अध्ययन और शोध का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो. शैलेन्द्र विक्रम सिंह ने किया। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक आनंद कुमार मौर्य, डॉ. महेश श्रीवास्तव, नित्यानंद सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया। वृक्षारोपण समिति के सदस्य डॉ. शफी उज्जमा, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. विपिन मौर्य, डॉ. अमित गुप्ता एवं डॉ. पल्लवी सिंह भी उपस्थित रहे।