
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यानुरागी का आयोजन, कविता अंत्याक्षरी और बोली आधारित गीत प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भावनाओं और अंतर्मन को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। जब व्यक्ति अपने दिल की बात सहजता से कहना चाहता है तो वह अपनी मातृभाषा अथवा उपभाषा का सहारा लेता है। इसलिए हिंदी बोलने में किसी को भी संकोच या शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। यह बातें जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने रविवार को हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हरिऔध कला भवन में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।

जनपद की अग्रणी साहित्यिक संस्था साहित्यानुरागी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने कहा कि दुनिया के अधिकांश देश अपनी मातृभाषा को सम्मान देकर अपनी पहचान को मजबूत करते हैं। हमें भी हिंदी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सम्मान और गौरव के साथ बोलना चाहिए। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में साहित्यकार एवं लेखक शेषनारायण त्रिपाठी ने भाषा, विभाषा और बोली में अंतर विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिंदी को छह विभाषाएं कंधे से कंधा मिलाकर समृद्ध कर रही हैं। भाषा का क्षेत्र जहां देश या प्रांत तक विस्तृत होता है, वहीं विभाषाएं जनपदीय अथवा उप-प्रांतीय स्तर पर अपना प्रभाव रखती हैं। एक भाषा के अंतर्गत अनेक विभाषाएं होती हैं और प्रत्येक का अपना विशिष्ट महत्व है। उन्होंने कहा कि साहित्य की अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं विभाषाओं में भी लिखी गई हैं। द्वितीय सत्र में कमलेश कमल ने हिंदी के प्रचलित शब्दों की उत्पत्ति और उनके सामाजिक प्रयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भाषा की समृद्धि में उसके शब्दों का सामाजिक प्रचलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बच्चों में हिंदी के प्रति रुचि जगाने का प्रयास
आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की अध्यक्ष डॉ. मनीषा मिश्रा ने साहित्यानुरागी की स्थापना से लेकर अब तक किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्था हिंदी भाषा के उन्नयन के लिए प्राथमिक स्तर से ही प्रयास कर रही है। विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए हिंदी को महज एक विषय नहीं, बल्कि भाषा और अस्मिता के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इस दौरान अतिथियों को बैज एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंशू अस्थाना ने किया। अंत में संस्था की संरक्षक डॉ. मालती मिश्रा ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सरोज यादव, विदुषी अस्थाना, प्रियंका श्रीवास्तव, अनूप सिंह, कंचन मौर्य, अरुण मौर्य, ममता राय, प्रीति वर्मा, रुक्मणि कुशवाहा, उदिता सिंह, विशाल, रितेश समेत बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।
