रूस-यूक्रेन युद्ध में आजमगढ़ के युवक की मौत, वर्दी का हुआ अंतिम संस्कार; परिजनों ने एजेंट को फांसी देने की उठाई मांग

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गार्ड की नौकरी का झांसा देकर रूस भेजने का आरोप, युद्ध में घायल होने के बाद हुई मौत; चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

आजमगढ़। कंधरापुर थाना क्षेत्र के माधोपट्टी गांव निवासी 35 वर्षीय जोगेंद्र यादव की रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मौत हो गई। परिजनों के अनुसार उन्हें मऊ जिले के एक एजेंट ने गार्ड और हेल्पर की नौकरी का लालच देकर जनवरी 2024 में रूस भेजा था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें सैन्य प्रशिक्षण देकर युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया।

परिवार का आरोप है कि मई 2024 में जोगेंद्र ने आखिरी बार फोन कर बताया था कि वह युद्ध में घायल हो गए हैं। इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। बाद में सूचना मिली कि युद्ध के दौरान विस्फोट में उनकी मौत हो गई और शव भी बरामद नहीं हो सका। प्रशासन के माध्यम से उनके घर केवल उनकी वर्दी पहुंची, जिसका परिवार ने पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया।

जोगेंद्र यादव के छोटे भाई सुनील यादव ने बताया कि एजेंट ने नौकरी का झांसा देकर उनके भाई को युद्ध की आग में धकेल दिया। परिवार ने इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर एजेंट विनोद यादव समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और फांसी की सजा की मांग की है।

जोगेंद्र अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी 18 वर्ष की है, जबकि अन्य तीन बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि अब बच्चों के भविष्य की चिंता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

परिजनों का कहना है कि इस तरह के एजेंटों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई अन्य युवक नौकरी के नाम पर इस तरह के जाल में फंसकर अपनी जान न गंवाए।

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