700 से अधिक राष्ट्रीय साइबर शिकायतों से जुड़े नेटवर्क का खुलासा, 10.46 लाख रुपये फ्रीज
थार समेत तीन वाहन, 13 हाई-एंड मोबाइल, विदेशी सिम, फर्जी दस्तावेज और 14 एटीएम कार्ड बरामद
आजमगढ़। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन CyVazra’ के तहत आजमगढ़ पुलिस ने देशव्यापी साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने अलग-अलग साइबर ठगी मॉड्यूल से जुड़े 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सैकड़ों राष्ट्रीय साइबर शिकायतों से इनके तार जुड़े मिले हैं। पुलिस ने साइबर ठगी से संबंधित 10 लाख 46 हजार रुपये विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कराए हैं।
पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के आदेश पर संचालित अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में साइबर सेल और विभिन्न थानों की पुलिस ने कार्रवाई की। साइबर सेल की तकनीकी जांच और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर कुल 13 मुकदमे दर्ज किए गए।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक महिंद्रा थार, एक होंडा और एक प्लेटिना मोटरसाइकिल, आईफोन-16 समेत 13 हाई-एंड मोबाइल फोन, विदेशी सिम कार्ड, बड़ी संख्या में फर्जी आधार, पैन और मतदाता पहचान पत्र, फर्जी मालदीव वर्क परमिट, विभिन्न फर्मों की कूटरचित मुहरें, 14 सक्रिय एटीएम व डेबिट कार्ड, चार ब्लैंक चेकबुक व चेक तथा 10,520 रुपये नकद बरामद किए हैं।
तीन दिन में 40 लाख का संदिग्ध लेन-देन
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य फर्जी फर्म बनाकर लोगों को रुपये का लालच देते और उनके नाम पर करंट बैंक खाते खुलवाते थे। खातों की पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और लिंक मोबाइल सिम अपने कब्जे में लेकर साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था। पुलिस के मुताबिक कुछ खातों में महज तीन दिनों में करीब 40 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन सामने आया है।
मालदीव में नौकरी का झांसा देकर ठगी
पुलिस जांच में फर्जी विदेशी वर्क परमिट के जरिए बेरोजगार युवकों और श्रमिकों से ठगी का भी खुलासा हुआ। आरोपी इंटरनेट से मालदीव के वर्क परमिट का टेम्पलेट डाउनलोड कर उसमें कूटरचना करते और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठते थे।
टेलीग्राम पर गेमिंग और प्रेडिक्शन फ्रॉड
गिरोह से जुड़े आरोपी टेलीग्राम पर फर्जी गेमिंग, कसीनो और प्रेडिक्शन चैनल संचालित करते थे। कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों से ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर कराए जाते और भुगतान मिलते ही पीड़ितों की आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी।
सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग का भी खुलासा
जांच में टेलीग्राम के माध्यम से अश्लील फोटो और वीडियो क्लिप उपलब्ध कराने तथा ब्लैकमेलिंग के जरिए अवैध आर्थिक लाभ कमाने की गतिविधियां भी सामने आई हैं। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा। पुलिस ने आमजन से साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।