
दो आरोपियों के खिलाफ अतरौलिया थाने में दर्ज हुआ मुकदमा, जिलाधिकारी ने 10 सितंबर को गैंग चार्ट किया अनुमोदित
हिंदी न्यूज़ 24
अतरौलिया/आजमगढ़। फर्जी अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर लोगों से रुपये ऐंठने के आरोप में दर्ज मुकदमों में नामजद दो आरोपियों के खिलाफ अब गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। अतरौलिया थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार तेजापुर निवासी मनोज यादव और ध्यानीपुर निवासी पिंटू यादव उर्फ कृष्णा के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम-1986 की धारा 2(ख)(i) व 3(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
एफआईआर में पुलिस ने आरोप लगाया है कि दोनों आरोपी मिलकर संगठित आपराधिक गिरोह संचालित कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह के जरिए फर्जी अग्निवीर भर्ती कराने और नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से रुपये लिए गए। इसके बाद फर्जी नियुक्ति पत्र देने तथा रुपये वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी सामने आए।
दो मुकदमों में सामने आया ठगी का मामला
पुलिस की एफआईआर के मुताबिक 25 मार्च 2026 को एक शिकायत के आधार पर अतरौलिया थाने में मुकदमा संख्या 118/2026 दर्ज किया गया था। इसमें पिंटू और मनोज यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई। विवेचना के दौरान दोनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने का उल्लेख एफआईआर में किया गया है।
इसी तरह 25 मार्च 2026 की दूसरी शिकायत के आधार पर मुकदमा संख्या 119/2026 दर्ज हुआ था। इस मामले में भी फर्जी अग्निवीर भर्ती के नाम पर रुपये लेने और फर्जी नियुक्ति पत्र देने का आरोप लगाया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय भेजे जाने का उल्लेख किया है।
जिला स्तर पर सक्रिय है गिरोह
एफआईआर में पुलिस ने कहा है कि उक्त गिरोह के आपराधिक कृत्यों से आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हुई और लोगों का सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ। पुलिस के अनुसार गिरोह की गतिविधियां अंतरजनपदीय स्तर तक सक्रिय बताई गई हैं। इसी आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए गैंग चार्ट तैयार किया गया।
पुलिस के मुताबिक गैंग चार्ट को जिलाधिकारी आजमगढ़ ने 10 सितंबर 2026 को अनुमोदित किया। इसके बाद मनोज यादव और पिंटू यादव उर्फ कृष्णा के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 2(ख)(i)/3(1) के तहत अतरौलिया थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। एफआईआर 13 सितंबर 2026 को दोपहर 12:15 बजे दर्ज हुई। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक विश्राम गुप्ता को सौंपी गई है।