
अतरौलिया पुलिस का अपराधियों पर शिकंजा, पति-ससुर समेत तीन दहेज हत्या में पकड़े गए, किशोरी को भगाने और छेड़खानी के आरोपी भी जेल भेजे
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अतरौलिया पुलिस ने अलग-अलग मामलों में वांछित पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनमें दहेज हत्या के दो मामलों में पति और ससुर समेत तीन आरोपी, किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने एवं पॉक्सो एक्ट के मामले में एक आरोपी तथा छेड़खानी, मारपीट और जान से मारने की धमकी के मामले में वांछित एक अभियुक्त शामिल है। पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
मोटरसाइकिल-चेन की मांग पूरी न होने पर हत्या का आरोप
पुलिस के अनुसार, दो मार्च 2026 को रंजना प्रजापति की तहरीर पर ननद अंजली प्रजापति को दहेज में मोटरसाइकिल और सोने की चेन की अतिरिक्त मांग को लेकर प्रताड़ित करने और उसकी हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में वांछित राजधारी उर्फ दिलीप (32) निवासी गजेन्धरपट्टी भेदौरा को पुलिस ने उसके घर के सामने से सुबह 9:35 बजे गिरफ्तार कर लिया।
पांच लाख की मांग के बाद विवाहिता की हत्या
दूसरे मामले में सात फरवरी 2026 को संतोष सिंह की तहरीर पर उनकी पुत्री अंकिता सिंह से दहेज में पांच लाख रुपये की मांग करने और प्रताड़ित करने के बाद हत्या किए जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में पुलिस ने आनंद प्रकाश सिंह (28) और उसके पिता दान बहादुर सिंह (53), निवासी ग्राम लोहरा, को उनके घर से सुबह 9:30 बजे गिरफ्तार किया।
किशोरी को भगाने के आरोपी पर पॉक्सो की धारा बढ़ी
इसके अलावा 19 जुलाई को नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में दर्ज मुकदमे में वांछित रजत (22) निवासी भीलमपुर छपरा को पुलिस ने रानीपुर तिराहे से सुबह 9:25 बजे गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक विवेचना के दौरान मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 की बढ़ोतरी की गई थी।
छेड़खानी-मारपीट के आरोपी को भी दबोचा
इसी क्रम में छेड़खानी, मारपीट और जान से मारने की धमकी के मामले में वांछित शैलेश कुमार सिंह (38) निवासी सिहोरा को 13 सितंबर की रात प्रताप नगर कॉलोनी, हीरापट्टी से रात 8:55 बजे हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि विवेचना के दौरान मुकदमे में बीएनएस की धारा 118(2) की भी बढ़ोतरी की गई।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी पांचों अभियुक्तों के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।