राष्ट्रीय लोक अदालत में 1.24 लाख मुकदमों का निस्तारण, 44 दंपती फिर हुए एक

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वर्षों से अलग रह रहे पति-पत्नी ने भुलाए मतभेद, अदालत परिसर में एक-दूसरे को माला पहनाकर लौटे घर

हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,24,817 मुकदमों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत की शुरुआत जिला जज जय प्रकाश पांडेय ने हाल ऑफ जस्टिस में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर की।
इस दौरान जिला जज ने अधिकारियों और वादकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है। यहां आपसी सहमति और सुलह-समझौते के आधार पर विवादों का सरल एवं त्वरित समाधान किया जाता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अंकित वर्मा ने बताया कि लोक अदालत के दौरान मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल के जज मुकेश कुमार सिंह ने 172, अपर जिला जज एंटी करप्शन अजय कुमार शाही ने चार, अपर जिला जज अजय श्रीवास्तव ने दो, एससी-एसटी कोर्ट के जज विजय कुमार वर्मा ने 10, विशेष न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्रा ने 908 और पॉक्सो कोर्ट के जज जैनुद्दीन अंसारी ने चार मुकदमों का निस्तारण किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यवीर सिंह ने 4,104, सिविल जज सीनियर डिवीजन रश्मि चंद ने 45, एसीजेएम कोर्ट नंबर 10 की नीतिका राजन ने 1,864 तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट अवर खंड की आस्था द्विवेदी ने 284 मुकदमों का निस्तारण किया।

44 दंपतियों के रिश्तों में फिर लौटी मिठास
राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल मुकदमों का निस्तारण ही नहीं हुआ, बल्कि कई टूटते रिश्तों को भी नया सहारा मिला। वर्षों से आपसी विवाद के कारण अलग रह रहे 44 दंपती काउंसलिंग और समझाइश के बाद फिर साथ रहने के लिए राजी हो गए।
परामर्शदाताओं ने दोनों पक्षों से बातचीत कर उन्हें रिश्ते की अहमियत समझाई। लंबी बातचीत और काउंसलिंग के बाद दंपतियों ने पुराने मतभेद भुलाकर साथ रहने का फैसला किया। अदालत परिसर में ही पति-पत्नी ने एक-दूसरे को माला पहनाई और मिठाई खिलाकर साथ घर लौट गए।
प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश अहसानुल्लाह खान ने कहा कि विवादों का समाधान ही लोक अदालत का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने साथ घर लौट रहे दंपतियों को सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
फैमिली कोर्ट नंबर एक के न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा और फैमिली कोर्ट नंबर दो के न्यायाधीश बालकृष्ण एन. रंजन ने भी पारिवारिक मूल्यों को बचाने और आपसी विवादों को बातचीत के माध्यम से समाप्त करने पर जोर दिया।
इस लोक अदालत में प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश अहसानुल्लाह खान ने 52, फैमिली कोर्ट नंबर एक के न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने 33 और फैमिली कोर्ट नंबर दो के न्यायाधीश बालकृष्ण एन. रंजन ने 22 मुकदमों का निस्तारण किया।
दंपतियों के बीच सुलह-समझौता कराने में काउंसलर कुलदीप सिंह, विभा सिंह, अरिमर्दन सिंह, प्रियंका प्रजापति, नीतू सरोज और ममता सिंह समेत अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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