
जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने डाटा एंट्री ऑपरेटर पर लगाया गाली-गलौज, लात-घूंसों से पीटने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। कोतवाली थाना क्षेत्र में काम को लेकर हुए विवाद के बाद जिला कार्यक्रम प्रबंधक के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता मृत्युंजय सिंह कश्यप की तहरीर के आधार पर डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रशांत पांडेय को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), 333 और 352 के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
21 मई को हुआ था विवाद
एफआईआर में मृत्युंजय सिंह कश्यप ने बताया है कि 21 मई 2026 को दोपहर करीब 12:55 बजे वह काम को लेकर प्रशांत पांडेय से बातचीत कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान प्रशांत ने गाली-गलौज शुरू कर दी और जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपी ने लात-घूंसों और थप्पड़ों से मारपीट की। शोर सुनकर आसपास के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव किया।
चोट लगने का भी लगाया आरोप
शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान उसके सिर समेत शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। घटना के बाद उसने स्थानीय थाने को सूचना दी। अगले दिन 22 मई को जिला अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराने और मेडिकल की छायाप्रति थाने में देने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।
थाने से कार्रवाई न होने पर पहुंचा न्यायालय
शिकायतकर्ता का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद थाने पर उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने 23 मई को रजिस्ट्री के माध्यम से उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी। 27 मई को पुलिस अधीक्षक को भी रजिस्ट्री डाक से सूचना देने की बात एफआईआर में कही गई है। कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने न्यायालय की शरण ली।
कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने का दिया आदेश
मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-20 में पहुंचा। दस्तावेजों और आवेदक के अधिवक्ता को सुनने के बाद न्यायालय ने 2 सितंबर 2026 को प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए कोतवाली थाना पुलिस को आरोपों के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का निर्देश दिया।
10 सितंबर को दर्ज हुई एफआईआर
न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 10 सितंबर 2026 को कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अभिषेक कुमार मिश्रा को सौंपी गई है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, मेडिकल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी स्थिति
एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुलिस विवेचना कर रही है। घटना के संबंध में आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। आरोपी पक्ष का बयान एफआईआर के उपलब्ध दस्तावेज में दर्ज नहीं है।