
25 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग के बाद 1976 और 1994 की फाइलें गायब होने का आरोप, सीबीआई जांच की मांग
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। अभिलेखों में 18 वर्षों तक मृत घोषित किए गए लाल बिहारी ‘मृतक’ ने न्याय व्यवस्था और सरकारी अभिलेखों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 25 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग किए जाने के बाद वर्ष 1976 और 1994 से संबंधित दोनों फाइलें वर्ष 2018 में कार्यालय/न्यायालय से गायब कर दी गईं। उनका दावा है कि फाइलों के गायब होने से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने की आशंका है।
लाल बिहारी ‘मृतक’ का आरोप है कि न्याय की मांग करने के बावजूद उन्हें राहत मिलने के बजाय उल्टा 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर दागी बना दिया गया। उनका कहना है कि आज तक दोनों फाइलों का पता नहीं चल सका है। उन्होंने इसे न्याय के अधिकार और मानवाधिकारों का गंभीर मामला बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 1976 और 1994 की कथित ‘जिंदा-मुर्दा’ फाइलों के गायब होने की सीबीआई से जांच कराई जाए और संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित नकल उपलब्ध कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
लाल बिहारी ‘मृतक’ ने कहा कि वर्षों तक अभिलेखों में मृत घोषित किए जाने के बाद भी उन्हें अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्होंने सरकार और न्याय व्यवस्था से सवाल करते हुए कहा कि यदि अभिलेख ही गायब कर दिए जाएंगे तो पीड़ित को न्याय कैसे मिलेगा।