वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान की गोष्ठी में संत कबीर की आध्यात्मिक परंपरा पर हुई चर्चा

आजमगढ़ आजमगढ़ खास खबर आजमगढ़ शहर


संत कबीर ने प्रेम, सत्य और मन की पवित्रता को बताया सच्चे धर्म का आधार

हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। शहर के अराजीबाग स्थित एएन मेमोरियल स्कूल में रविवार, 25 अक्टूबर को वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में आध्यात्मिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें ‘संत कबीर आध्यात्मिक परंपरा के वाहक’ विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक कुमार अग्रवाल ने की, जबकि संचालन आध्यात्मिक सचिव सुरेंद्र नाथ पांडेय ने किया।
गोष्ठी में विरजा शंकर राय ने संत कबीर के जन्म और उनके जीवन से जुड़ी जानकारियां साझा कीं। प्रेमचंद श्रीवास्तव ने कहा कि संत कबीर किताबी ज्ञान के बजाय आत्मज्ञान और अनुभव को अधिक महत्व देते थे। सुरेंद्र नाथ पांडेय ने कबीर और उनके गुरु स्वामी रामानंद से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कबीर ने गुरु से राम नाम का मंत्र प्राप्त करने के लिए गहरी लगन और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया था।
डॉ. निरंकार प्रसाद श्रीवास्तव ने संत कबीर के पारिवारिक जीवन और उनकी रचनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कबीर की रचनाएं साखी, सबद और रमैनी के रूप में प्रसिद्ध हैं तथा इनका संकलन बीजक में मिलता है। उन्होंने कबीर के प्रसिद्ध दोहे ‘पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।’ के माध्यम से प्रेम के महत्व को रेखांकित किया।
अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि संत कबीर निर्गुण ब्रह्म और निराकार ईश्वर में विश्वास करते थे। उन्होंने धार्मिक आडंबर, पाखंड और अहंकार का विरोध करते हुए प्रेम, सत्य तथा मन की पवित्रता को सच्चे धर्म का आधार बताया। कबीर की शिक्षाएं आज भी समाज को सद्भाव, समानता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देती हैं।
कार्यक्रम में दिलशेर यादव, प्रभा शंकर त्रिपाठी, सच्चिदानंद सिंह, वेदप्रकाश, रमेश चंद गुप्ता, विश्वनाथ अग्रवाल, जनार्दन विद्यार्थी, राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, भूपेंद्र सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *