

गोली मारकर हत्या के मामले में संजय को आजीवन कारावास, दो आरोपियों को छह-छह माह की सजा
45 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, दो आरोपी पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्रा की अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मुख्य आरोपी संजय को हत्या और अवैध असलहा रखने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 45 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं इसी मुकदमे के आरोपी मृत्युंजय और पंकज पांडेय को साधारण मारपीट का दोषी पाते हुए छह-छह महीने के कारावास तथा एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सरोज पांडेय और उपेंद्र पांडेय को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। अर्थदंड की आधी राशि मृतक के वैध वारिस को दिए जाने का आदेश दिया गया है।
दीवार की सुरक्षा के लिए मिट्टी डालने के दौरान हुआ था विवाद
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुन्ना पांडेय निवासी शाहपुर कानूनगो, थाना तरवां 29 नवंबर 2019 की सुबह करीब नौ बजे अपने पुत्रों इंद्रसेन और चंद्रमणि के साथ दीवार की सुरक्षा के लिए मिट्टी डाल रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी संजय, मृत्युंजय, पंकज पांडेय, सरोज पांडेय और उपेंद्र पांडेय वहां पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे।
वादी द्वारा विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसी दौरान संजय ने चंद्रमणि पांडेय को गोली मार दी। गोली लगने से चंद्रमणि गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
10 गवाहों के बयान के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ओम प्रकाश सिंह, निर्मल शर्मा तथा सुधन प्रसाद एडवोकेट ने कुल 10 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी संजय को हत्या तथा अवैध असलहा रखने का दोषी पाया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 45 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं आरोपी मृत्युंजय और पंकज पांडेय को साधारण मारपीट का दोषी पाते हुए छह महीने के कारावास तथा प्रत्येक पर एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।
इसके अलावा सरोज पांडेय और उपेंद्र पांडेय के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने दोनों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने अर्थदंड की आधी राशि मृतक के वैध वारिस को दिए जाने का भी आदेश दिया।