
सात महीने का वेतन, यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि नहीं देने की शिकायत, फ्रेंचाइजी संचालकों के साथ धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। मार्केटिंग कंपनी में बिजनेस डेवलपर मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे एक व्यक्ति की शिकायत पर कंपनी के मालिक समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़ित ने सात महीने का वेतन, यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि समेत कुल 5.10 लाख रुपये बकाया रखने का आरोप लगाया है। इसके अलावा फ्रेंचाइजी संचालकों के साथ मिलकर धोखाधड़ी करने और बकाया रकम मांगने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने मामले में अभियोग पंजीकृत किया है।
45 हजार रुपये मासिक वेतन पर हुई थी नियुक्ति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाजीपुर जनपद के मूल निवासी और वर्तमान में आजमगढ़ के लक्षिरामपुर में रहने वाले अंकित कुमार साहू ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उन्हें एक जनवरी 2026 को बीआईपी स्टोर प्राइवेट लिमिटेड (बेस्ट प्राइस) में बिजनेस डेवलपर मैनेजर के पद पर नियुक्त किया गया था। कंपनी की ओर से उन्हें 45 हजार रुपये मासिक वेतन और यात्रा भत्ता देने का आश्वासन दिया गया था। इसके साथ ही तीन महीने के भीतर फ्रेंचाइजी खुलवाने पर 50 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की बात कही गई थी।
आजमगढ़ में खुलवाईं तीन फ्रेंचाइजी
अंकित कुमार साहू के मुताबिक, कंपनी के अधिकारियों के भरोसे पर उन्होंने आजमगढ़ में तीन फ्रेंचाइजी खुलवाईं। आरोप है कि बाद में कंपनी ने फ्रेंचाइजी संचालकों को सामान उपलब्ध कराने में आनाकानी शुरू कर दी। दूसरी ओर, पीड़ित को सात महीने का वेतन, यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी नहीं किया गया।
पीड़ित का दावा है कि फ्रेंचाइजी का कारोबार और अपनी साख बचाने के लिए उन्होंने निजी पूंजी लगाकर भी सामान की आपूर्ति की, लेकिन उसकी रकम का भुगतान नहीं किया गया। इस तरह उनके कुल 5.10 लाख रुपये बकाया हो गए।
कंपनी मालिक समेत चार लोगों पर साजिश का आरोप
पीड़ित ने कंपनी के मालिक प्रमोद कुमार गिरी उर्फ प्रियांशु गोस्वामी, रीजनल हेड संतोष कुमार शर्मा तथा फ्रेंचाइजी संचालक वीरेंद्र कुमार चौहान और सुनीता वर्मा पर साजिश के तहत धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने बकाया रकम मांगी तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस से कार्रवाई नहीं होने पर पहुंचे न्यायालय
अंकित के अनुसार, उन्होंने पहले स्थानीय पुलिस और फिर नौ जुलाई 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। आरोप है कि इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
प्रार्थना पत्र में यह भी दावा किया गया है कि कंपनी के निर्धारित पते पर पहुंचने पर कार्यालय बंद मिला और वेबसाइट का डोमेन भी बदल दिया गया था। अंततः न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने कंपनी के मालिक समेत चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।