
ताड़का वध पर लगे जय श्रीराम के जयकारे, रामलीला में दर्शक हुए भावविभोर
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। पुरानी कोतवाली में चल रही श्रीरामलीला के तीसरे दिन रविवार की रात श्रीराम जन्म, विश्वामित्र आगमन और ताड़का वध का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम का जन्म होते ही पंडाल मंगलगीतों और जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं ने सोहर गाकर खुशियां मनाईं तो ताड़का वध के दृश्य पर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
रामलीला की शुरुआत भगवान श्रीराम, श्रीविष्णु और रामायण की आरती से हुई। इसके बाद कलाकारों ने राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति न होने से चिंतित दिखाया। गुरु वशिष्ठ के परामर्श पर राजा दशरथ अत्रि मुनि के पास पहुंचे। अत्रि मुनि की सलाह पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराया गया। यज्ञ से प्रसन्न होकर अग्निदेव ने राजा दशरथ को फल प्रदान किया। इसके बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। श्रीराम जन्म का प्रसंग मंचित होते ही दर्शक भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल मंगलगीतों से गूंजने लगा।
इसके बाद विश्वामित्र आगमन का मंचन हुआ। यज्ञ की रक्षा के लिए महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ से श्रीराम को अपने साथ भेजने का आग्रह करते हैं। पुत्र मोह और राजधर्म के बीच राजा दशरथ की दुविधा को कलाकारों ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। गुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ श्रीराम और लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजने के लिए तैयार हो जाते हैं।
विश्वामित्र के साथ जाते समय श्रीराम ताड़का का वध करते हैं। ताड़का वध का दृश्य देखते ही दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूब गया।