
निजामाबाद के चकाली गांव का मामला, मृतक के बेटे ने जेई, एसडीओ और एसएसओ को दी गई पूर्व शिकायत का हवाला देकर लगाया लापरवाही का आरोप, पुलिस ने BNS की धारा 106(1) में दर्ज किया केस
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। निजामाबाद थाना क्षेत्र के चकाली गांव में बिजली के करंट की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत के मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के पुत्र ने आरोप लगाया है कि हादसे से पहले बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों को समस्या की जानकारी दी गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद करंट की चपेट में आने से उनके पिता सुरेंद्र की मौत हो गई।
मृतक के पुत्र दीपक सिंह की शिकायत पर निजामाबाद पुलिस ने अज्ञात बिजली विभाग के कर्मचारी/जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
29 सितंबर को करंट की चपेट में आए थे सुरेंद्र
एफआईआर के मुताबिक घटना 29 सितंबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे हुई। चकाली गांव निवासी सुरेंद्र बिजली के करंट की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
बेटे का आरोप- पहले ही दी गई थी शिकायत
मृतक के पुत्र दीपक सिंह का आरोप है कि हादसे से पहले बिजली विभाग के जेई, एसडीओ और एसएसओ को विद्युत संबंधी समस्या की जानकारी देकर शिकायत की गई थी। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद विभागीय स्तर पर समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाया गया।
दीपक ने आरोप लगाया कि यदि शिकायत पर समय रहते कार्रवाई की जाती तो संभवत: यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने दुर्घटना के लिए जिम्मेदार विभागीय कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
5 अक्टूबर की रात दर्ज हुई एफआईआर
शिकायत के आधार पर निजामाबाद थाने में 5 अक्टूबर 2026 की रात 8:45 बजे मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत दर्ज किया है।
एफआईआर में आरोपी के तौर पर बिजली विभाग के अज्ञात कर्मचारी/जिम्मेदार व्यक्ति को दर्शाया गया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक/वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुरेश सिंह यादव को सौंपी गई है।
शिकायत से लेकर हादसे तक की होगी जांच
अब पुलिस पूरे मामले की पड़ताल करेगी। जांच में यह देखा जाएगा कि हादसे से पहले बिजली विभाग को वास्तव में किस प्रकार की शिकायत दी गई थी, शिकायत किस अधिकारी या कर्मचारी को मिली थी और उसके बाद विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई। साथ ही हादसे की परिस्थितियों और इसमें किसी व्यक्ति की लापरवाही की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुरेंद्र की मौत के लिए कौन जिम्मेदार था और विभागीय स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।