मदरसे की मान्यता निलंबित करने पर हाईकोर्ट का ‘ब्रेक’! कथित फर्जी दानपत्र मामले में रजिस्ट्रार के आदेश पर रोक

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मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता निलंबन के खिलाफ प्रबंधक की याचिका पर हाईकोर्ट का आदेश, 20 अगस्त के आदेश का प्रभाव और क्रियान्वयन अगले आदेश तक रोका
कथित फर्जी दानपत्र से मान्यता लेने की शिकायत के बाद मचा विवाद
शिकायतकर्ता हाजी इमाम अली ने मदरसा शिक्षा परिषद में की थी शिकायत, प्रबंधक का जवाब संतोषजनक न मिलने पर रजिस्ट्रार ने निलंबित की थी मान्यता

हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़/लखनऊ। कथित फर्जी दानपत्र के आधार पर मदरसे की मान्यता हासिल करने के आरोप से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रजिस्ट्रार मदरसा परिषद के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने 20 अगस्त 2026 को मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता निलंबित करने वाले आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
मामला उस समय सामने आया जब शिकायतकर्ता हाजी इमाम अली ने मदरसा शिक्षा परिषद, लखनऊ में शिकायत दाखिल कर आरोप लगाया कि मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता कथित तौर पर फर्जी दानपत्र के आधार पर हासिल की गई है।

जवाब से संतुष्ट नहीं हुए रजिस्ट्रार, निलंबित कर दी मान्यता
शिकायत के बाद मदरसे के प्रबंधक जहीन अहमद की ओर से अपना जवाब प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि रजिस्ट्रार मदरसा परिषद ने जवाब को संतोषजनक नहीं माना और 20 अगस्त 2026 को मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी।
इसके साथ ही मदरसे की प्रबंध समिति के तत्कालीन और वर्तमान सदस्यों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का आदेश भी दिया गया।

रजिस्ट्रार के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती
मान्यता निलंबित किए जाने के बाद मदरसे के प्रबंधक जहीन अहमद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया। रिट याचिका में रजिस्ट्रार के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि मान्यता निलंबित करने की शक्ति का इस्तेमाल निर्धारित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।
प्रबंध समिति की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि दो प्रमुख परिस्थितियों में ही ऐसी कार्रवाई की जा सकती है—पहली, मान्यता की शर्तों का अनुपालन न किया गया हो और दूसरी, मदरसा बोर्ड के आदेश का पालन न किया गया हो।

2010 में निरीक्षण के बाद अनुदान की संस्तुति का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2010 की कार्रवाई का भी हवाला दिया गया। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जब मदरसे को अनुदान पर लेने की प्रक्रिया चल रही थी, तब तत्कालीन जिलाधिकारी ने मदरसे का भौतिक निरीक्षण किया था और इसके बाद ही अनुदान पर लेने की संस्तुति की गई थी।
दलील दी गई कि इसके बावजूद मौजूदा मामले में बिना स्थलीय निरीक्षण किए ही मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी गई।

‘दानपत्र वैध है या अवैध, बाद में देखेंगे’
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कथित फर्जी दानपत्र का मुद्दा उठाया गया। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि दानपत्र वैध है या अवैध, इस सवाल पर बाद में विचार किया जाएगा।
मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने रजिस्ट्रार मदरसा परिषद के 20 अगस्त 2026 के निलंबन आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।

चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने विपक्षी पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अब अगली सुनवाई में मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अदालत आगे विचार करेगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से मदरसे की मान्यता निलंबित करने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लग गई है। दानपत्र की वैधता और मान्यता से जुड़े मूल विवाद पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

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