
एआईपीएसएफ की विचार गोष्ठी में शिक्षा, रोजगार, महंगाई और निजीकरण के मुद्दों पर हुई चर्चा
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। अखिल भारत प्रगतिशील छात्र मंच (एआईपीएसएफ) आजमगढ़ की ओर से रविवार को करतालपुर बाईपास के निकट स्थित सावरकर शिशु निकेतन स्कूल, सराय मंदराज में “भगत सिंह के विचारों की वर्तमान संघर्षों में अहमियत” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, महंगाई, निजीकरण और सामाजिक-आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत जितेंद्र कुमार नूर ने शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं व गजलों की प्रस्तुति से की। इसके बाद “इंकलाब जिंदाबाद”, “भगत सिंह का यही पैगाम, जारी रखना है संग्राम”, “सबको मुफ्त शिक्षा, सबको स्थायी काम—लड़कर लेगा नौजवान” तथा “पूंजीवाद-साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा।
विचार गोष्ठी का आधार वक्तव्य रखते हुए राहुल ने कहा कि समाज के वर्गीकृत होने के कारण शिक्षा व्यवस्था भी वर्गीय स्वरूप में विकसित हुई है। उन्होंने दोहरी शिक्षा व्यवस्था का आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब और अमीर वर्ग के बच्चों के लिए अलग-अलग शिक्षा मॉडल बनाए गए हैं।
उन्होंने शहीद-ए-आजम भगत सिंह के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ देश की परिस्थितियों को समझने और उनके सुधार के उपायों पर विचार करने की जरूरत बताई गई थी।
रामाश्रय यादव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में निजीकरण बढ़ने से आम लोगों के लिए शिक्षा महंगी होती जा रही है। उन्होंने 1986 की शिक्षा नीति और 1991-92 की नई आर्थिक नीति के बाद शिक्षा क्षेत्र में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए इसे बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया बताया।
सूबेदार यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। उन्होंने सरकारी स्कूलों के बंद होने और विलय की प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
दुखहरन ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, इसके बावजूद पर्याप्त भर्ती नहीं हो रही है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में कक्षाओं, शिक्षकों, डेस्क, बिजली, पंखे, पेयजल और स्वच्छ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया।
अखिलेश ने NEET, JEE, CUET सहित विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पेपर लीक और भ्रष्टाचार की घटनाओं पर चिंता जताते हुए शिक्षा और रोजगार के अवसरों को व्यापक बनाने की मांग की।
अध्यक्ष मंडल के चंदन कुमार ने कहा कि शिक्षित नौजवानों के लिए स्थायी रोजगार की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने युवाओं से भगत सिंह के विचारों को समझने और वर्तमान सामाजिक संघर्षों से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने जातिगत भेदभाव और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े आंदोलनों के समर्थन की भी बात कही।
केदारनाथ वर्मा ने कहा कि महंगाई के दौर में बड़ी संख्या में छात्र और नौजवान अपनी तथा परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए निजी स्कूलों, अस्पतालों, दुकानों, होटलों, कंपनियों और डिलीवरी व अन्य प्लेटफॉर्म आधारित कार्यों में लंबे समय तक काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने रोजगार की असुरक्षा और कम वेतन का मुद्दा उठाया।
ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि भगत सिंह का आंदोलन भारत को हर प्रकार के शोषण से मुक्त कराने और समाजवादी क्रांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए था। उन्होंने युवाओं से भगत सिंह के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
स्कूल के प्रबंधक राजमणि यादव ने छात्रों को पढ़ाई के साथ सामाजिक सरोकारों और संघर्षों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने भगत सिंह के विचारों पर भी अपने विचार रखे।
अध्यक्ष मंडल के सत्यदेव पाल ने कहा कि देश में आर्थिक-सामाजिक असमानता, शोषण, महंगाई, निजीकरण, बेरोजगारी और शिक्षा-स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति को लेकर छात्रों, नौजवानों, मजदूरों और किसानों में असंतोष है। उन्होंने कहा कि इस असंतोष को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से व्यापक बदलाव की दिशा में ले जाने की जरूरत है।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रशांत ने कहा कि शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए संगठनबद्ध होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने “सबको निःशुल्क, एक समान और वैज्ञानिक शिक्षा तथा जीवन निर्वाह लायक वेतन के साथ स्थायी रोजगार की गारंटी” को प्रमुख मांग बताते हुए निजीकरण, महंगाई, बेरोजगारी, असमानता और सामाजिक असुरक्षा के खिलाफ एकजुट आंदोलन का आह्वान किया।
कार्यक्रम में रवि, हरिनारायण, जितेंद्र कुमार नूर, चंदन कुमार, सूबेदार यादव, रामाश्रय यादव, प्रशांत, अनमोल, अखिलेश सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।