शैदा का साहित्य आजमगढ़ की धरोहर : प्रो. गीता सिंह

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शैदा जयंती एवं साहित्यिक समारोह में साहित्यकारों का सम्मान, ‘गुनगुने गीत’ पुस्तक का लोकार्पण, देर रात तक चली सरस कवि गोष्ठी

हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। शैदा साहित्य मंडल आजमगढ़ की ओर से प्रतिभा निकेतन स्कूल, अतलस पोखरा में शैदा जयंती एवं साहित्यिक समारोह-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचस्थ अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद श्री देवेंद्र तिवारी ‘देव’ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत शैदा साहित्य मंडल के संयोजक डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव ने किया।
अध्यक्षीय संबोधन में डीएवी पीजी कॉलेज आजमगढ़ के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. गीता सिंह ने कहा कि शैदा का साहित्य आजमगढ़ की धरोहर है। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘दुर्गे’, ‘रक्षिका’, ‘साजन के गीत’, ‘कसक’ और ‘अंतर ज्योति’ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शैदा के नाम पर स्थापित संस्था वर्ष 1984 से लगातार आजमगढ़ में पुस्तकों के प्रकाशन, लोकार्पण और वरिष्ठ साहित्यकारों के सम्मान का कार्य कर रही है।
श्री संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि शैदा जी की कुल 16 पुस्तकें प्रकाशित हैं, जबकि कई रचनाएं अभी अप्रकाशित हैं, जिन्हें भविष्य में प्रकाशित किया जाएगा। श्री अजय कुमार गुप्ता ने शैदा के व्यक्तित्व और कृतित्व को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं और भविष्य में भी पाठकों को प्रभावित करती रहेंगी।
शैदा साहित्य मंडल के महामंत्री श्री राजेश अस्थाना ‘अनंत’ ने शैदा की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘साजन के गीत’ में मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती है।

समारोह में शैदा साहित्य मंडल के प्रथम संस्थापक अध्यक्ष स्व. सूरत सहाय लाल ‘ध्रुव’ को मरणोपरांत शैदा साहित्य सम्मान 2026-27 से सम्मानित किया गया। उनकी ओर से उनके सुपुत्र डॉ. भक्तवत्सल श्रीवास्तव और पुत्रवधू श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव ने सम्मान ग्रहण किया।
स्व. ध्रुव के साहित्य पर प्रकाश डालते हुए श्री गांधी पीजी कॉलेज मालटारी के प्रो. अखिलेश चंद्र ने कहा कि 27 जुलाई 1916 को जन्मे ध्रुव जी ने साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘स्त्रियों के मंगल गीत’, ‘चरखा चतुर्दशी’, ‘जिज्ञासा’, ‘मानस शब्दानुशासन’ और ‘पुष्पांजलि’ शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ के अवधी शब्दों की व्याकरणीय विवेचना पर आधारित ‘मानस शब्दानुशासन’ हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण शोधग्रंथ के रूप में स्थापित है। सम्मान ग्रहण करने के बाद डॉ. भक्तवत्सल श्रीवास्तव ने शैदा साहित्य मंडल के प्रति आभार जताया।

समारोह में जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार श्री कन्हैया लाल अस्थाना ‘प्रहरी’ की पुस्तक ‘गुनगुने गीत’ का भी लोकार्पण किया गया। पुस्तक पर चर्चा करते हुए प्रो. जगदंबा प्रसाद दुबे ने कहा कि पुस्तक के गीत गेयतापूर्ण हैं और उन्हें संगीतबद्ध किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लेखक ने स्त्री विमर्श, राष्ट्रीय विमर्श और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों को अपनी रचनाओं में स्थान दिया है।
श्री राजेश अस्थाना ‘अनंत’ ने कहा कि ‘गुनगुने गीत’ के प्रसंग बेबाकी से समाज के सामने अपनी बात रखते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कृति हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी। लेखक श्री कन्हैया लाल अस्थाना ‘प्रहरी’ ने सभी अतिथियों और साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सरस कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें जनपद और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।
श्री रुद्रनाथ चौबे ने ओजपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि श्री अभिराज ‘बेदर्दी’ ने भोजपुरी रचना ‘चिरई का घोंसला हो गइल’ सुनाकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। श्री दिनेश कन्नौजिया ‘बिलरियागंज’ ने ‘जन्मदिन मुबारक हो, ये मुबारक घराना है’ प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरिहर पाठक ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की।
डॉ. वंदन सिंह ने ‘ये दर्द अपना है, कोई मरहम क्यों नहीं लगाता’ सुनाकर श्रोताओं को भावुक किया। वरिष्ठ भोजपुरी गीतकार श्री कृष्ण देव ‘घायल’ मऊ ने भोजपुरी गीतों से समां बांधा। मुख्य अतिथि डॉ. संजय सिंह ‘सागर’ जौनपुर ने श्रृंगार रचना ‘मन के तारों को न छेड़ा करो, मन की मदिरा अभी ये छलक जाएगी’ प्रस्तुत की।
श्री राज कुमार ‘आशीर्वाद’ ने ‘यार के नसीब में जुदाई-जुदाई’ सुनाकर मंत्रमुग्ध किया। श्री बृजबाला श्रीवास्तव ने चित्रगुप्त पर रचना प्रस्तुत की। श्री कौशल किशोर राय ने ‘मेरा सावन बीता जाय’ सुनाया।
श्री सौरभ राय की भोजपुरी रचना ‘जहिया से दिनवा धराईल ये पापा’ ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। डॉ. अभिषेक पांडेय ने इलाहाबाद के दिनों की स्मृतियों से जुड़े गीत प्रस्तुत किए। श्री सीताराम पांडेय ने हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ की पंक्तियां सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
श्री जय हिंद सिंह ‘हिंद’ ने सोशल मीडिया पर बदलते सामाजिक व्यवहार पर दोहा और रचना प्रस्तुत की। श्री देवेंद्र तिवारी ‘देव’ ने ‘गम के आंसू को छुपाकर मुस्कुराना चाहते हैं, प्यार की बस्ती में घर बसाना चाहते हैं’ सुनाया। श्री अजय कुमार गुप्ता ने कविता प्रस्तुत की, जबकि डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव की हास्य-व्यंग्य रचना ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
प्रो. अखिलेश चंद्र ने अपना हस्ताक्षर गीत ‘मां भारती का हर वक्त सम्मान करता हूं, आजमगढ़ की चंदन जैसी मिट्टी को प्रणाम करता हूं’ प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे श्री राजेश अस्थाना ‘अनंत’ ने ‘जब एक वृक्ष गिरता है तो केवल लकड़ी नहीं टूटती’ कविता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. गीता सिंह ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को समृद्ध किया। उनकी रचना ‘अनेकता में एकता’ के साथ ‘पीड़ा जो आज मिली है, आलिंगन इसका कर लो…’ ने कार्यक्रम को भावपूर्ण समापन की ओर पहुंचाया।

समारोह में आजमगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षक, शोधार्थी और साहित्यप्रेमी शामिल हुए। प्रमुख रूप से प्रो. प्रेम चंद्र यादव, श्री मैकश आजमी, डॉ. नंदिनी पांडेय, श्री प्रेमदत्त यादव, श्री आलोक शर्मा, डॉ. हरिकेश मिश्रा, श्री सचिन श्रीवास्तव, डॉ. देवेश दुबे, डॉ. अवनीश अस्थाना, श्री हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, श्रीमती वर्षा उपाध्याय, श्री मनोज उपाध्याय, श्री गांधी नेहाल, श्री रोहित राही, श्री अनिल राय, श्री देवी प्रसाद तिवारी, श्री जय प्रकाश यादव, श्री उदय राज यादव, श्री ऋत्विक जायसवाल, डॉ. अनुतोष श्रीवास्तव, श्री कृष्णकांत मिश्र, डॉ. पीसी श्रीवास्तव, श्री अभिषेक श्रीवास्तव, श्री दुर्गेश श्रीवास्तव, श्री लालजी यादव और श्री राधेश्याम सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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