
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में साहित्यिक योगदान के लिए हुए सम्मानित, आजमगढ़ का बढ़ाया गौरव
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। शिक्षा संकाय, श्री गांधी पीजी कॉलेज मालटारी, आजमगढ़ के प्रो. अखिलेश चंद्र को उनके साहित्यिक योगदान के लिए ‘मानस शब्द शिल्पी सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के भोजपुरी अध्ययन केंद्र और मानस पत्रिका वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह एवं कला महोत्सव में प्रदान किया गया।
12 सितंबर को राहुल सभागार, भोजपुरी अध्ययन केंद्र वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. अखिलेश चंद्र को कथाकार, कवि, समीक्षक और गीतकार के रूप में उनके लंबे साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वे अखिल गीत शोध दृष्टि अंतरराष्ट्रीय शोध अर्द्धवार्षिक पीयर रिव्यूड जर्नल के प्रधान संपादक भी हैं।

26 वर्षों से साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय
प्रो. अखिलेश चंद्र पिछले 26 वर्षों से आजमगढ़ की साहित्यिक धरती से जुड़े हुए हैं। उनकी ‘पर्यावरण दशा और दिशा’, ‘उच्च शिक्षा दशा और दिशा’, ‘सहचर मन’, ‘पर्यावरण शिक्षा’, ‘बर्न आउट एंड पर्सनैलिटी फैक्टर’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’, ‘अनकही’ और ‘रेहन पर खेत’ जैसी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पिछले 16 वर्षों से उनके प्रधान संपादन में प्रकाशित अखिल गीत शोध दृष्टि के अब तक 26 अंक प्रकाशित हो चुके हैं। उनके अनुसार, पत्रिका का लेखकीय प्रसार भारत के 23 राज्यों और विश्व के छह देशों तक है। उनके 70 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं।
कहानियों और गीतों ने भी बनाई पहचान
प्रो. अखिलेश चंद्र की कहानी ‘हंसूली’ का नाट्य रूपांतरण समूहन कला संस्थान आजमगढ़ द्वारा किया गया है, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 24 बार मंचन हो चुका है। उनके लिखे गीत ‘हमार सुगना’, ‘लेवे दिहे मोहे जनम हो’, ‘मेरे राम आए हैं’, ‘जिंदगी बस प्यार का ताना-बाना है’ और ‘तेरे संग जीना है, अब तेरे संग मरना है’ भी लोकप्रिय हैं। उनकी नई पुस्तक ‘रेहन पर खेत’ सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है। आयोजकों के अनुसार पुस्तक को पाठकों की ओर से व्यापक सराहना मिली है। इस पुस्तक का लोकार्पण महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के तीसरे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, कुलपति प्रो. संजीव कुमार और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की मौजूदगी में हुआ था।
साहित्यकारों ने दी बधाई
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ला ने की। मंच पर प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. कमलेश वर्मा, डॉ. रवि नंदन सिंह, श्रीमती पारुल सिंह राठौर और डॉ. विभा शंकर मौजूद रहे। संचालन प्रीति विश्वकर्मा ने किया। कार्यक्रम का संयोजन मानस पत्रिका वाराणसी के संपादक डॉ. आर्यपुत्र दीपक ने किया। इस अवसर पर डॉ. लेफ्टिनेंट चंदन कुमार, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. शिव शंकर यादव, सुश्री निष्ठा सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने प्रो. अखिलेश चंद्र को सम्मान मिलने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।