हत्या के मामले में तीन आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास, एक को किया दोषमुक्त

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कोर्ट ने प्रत्येक पर 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया, विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश


जुर्माने की 80 प्रतिशत धनराशि मृतक की पत्नी को दिए जाने का भी अदालत ने दिया आदेश


आजमगढ़। हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को पचास-पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि एक आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने जुर्माने की 80 प्रतिशत धनराशि मृतक की पत्नी को देने का आदेश दिया है। साथ ही मुकदमे की विवेचना ठीक से न करने पर विवेचक मनीष पाल के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है।


यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा विनोद चैहान, निवासी आलमपुर, थाना अहरौला की गांव के रामसेवक चैहान से रंजिश चल रही थी। इस रंजिश को लेकर वादी विनोद चैहान की पत्नी इसरावती ने 22 सितंबर 2024 को एक मुकदमा दर्ज कराया था। इससे नाराज होकर 29 सितंबर 2024 की रात शुभम चैहान, रामसेवक चैहान, सुरेंद्र आदि ने वादी विनोद चैहान के पिता श्रीराम की गोली मारकर हत्या कर दी। इस हत्या के मामले में वादी विनोद चैहान ने शुभम चैहान समेत दस लोगों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई।


जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा तथा जितेंद्र यादव, अधिवक्ता ने कुल नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी शुभम चैहान, रामसेवक तथा सुरेंद्र को सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि एक आरोपी सतिराम को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।

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