
पितृ पक्ष में राजघाट पर पिंडदान और तर्पण कर अज्ञात आत्माओं की शांति के लिए की प्रार्थना, ब्राह्मण भोज के बाद सैकड़ों लोगों ने किया सामूहिक भोज
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। जिन्हें अपनों ने ठुकरा दिया या जिनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं मिला, उनके लिए सामाजिक संगठन भारत रक्षा दल के कार्यकर्ता वर्षों से अपनेपन का फर्ज निभा रहे हैं। वर्ष 2013 में शुरू हुआ लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का यह सिलसिला कोरोना काल में भी नहीं थमा। संगठन की ओर से अब तक 701 लावारिस मृतकों का दाह संस्कार कराया जा चुका है। हर साल पितृ पक्ष में इन दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है।

इसी क्रम में इस वर्ष तमसा नदी के किनारे राजघाट पर अनजान और अपरिचित मृतकों के लिए तर्पण व पिंडदान कर श्रद्धा अर्पित की गई। पंडित सभाजीत पांडेय और पंडित सुजीत पाठक ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इस दौरान भारत रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, विनोद शर्मा, जैनेंद्र चौहान, प्रदीप चौहान, आरपी श्रीवास्तव, सुनील वर्मा और हरेंद्र यादव समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने लावारिस मृतकों के वारिस के रूप में यजमान की भूमिका निभाई।
अपनों की तरह हुआ श्राद्ध, ब्राह्मणों को भेंट किए अंगवस्त्र और दक्षिणा
राजघाट पर कर्मकांड संपन्न होने के बाद भारत रक्षा दल के कुंदीगढ़ (कटरा) स्थित केंद्रीय कार्यालय पर ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया। ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ अंगवस्त्र, बर्तन और दक्षिणा भेंट की गई। इसके बाद सामूहिक भोज शुरू हुआ, जिसमें संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के अलावा सैकड़ों लोगों ने भोजन ग्रहण किया।
भोजन की व्यवस्था भी पारंपरिक श्राद्ध भोज की तरह की गई थी। इसमें कोहड़ा-चना, पनीर की सब्जी, पूड़ी, सलाद, दही, मीठी बूंदी और पापड़ परोसे गए। भोजन करने पहुंचे लोग लावारिस मृतकों के प्रतीकात्मक चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के बाद पंगत में शामिल हुए। आयोजन के जरिए उन मृतकों को सम्मान और अपनापन देने का प्रयास किया गया, जिनका दुनिया में कोई अपना नहीं था।
त्योहार के दिन भी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते कार्यकर्ता
अनुष्ठान का नेतृत्व कर रहे भारत रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजन अपनी परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार करते हैं, लेकिन लावारिस मृतकों को अंतिम विदाई देने वाला कोई नहीं होता। मानव शरीर की दुर्गति देखकर संगठन के सदस्यों ने ऐसे मृतकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया था। वर्ष 2013 से यह कार्य लगातार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक 701 लावारिस मृतकों का दाह संस्कार कराया जा चुका है। इस कार्य के लिए प्रतिदिन कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। खास बात यह है कि यदि किसी लावारिस शव के अंतिम संस्कार का दिन त्योहार पर भी पड़ता है, तब भी कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते।
हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव ने इस सेवा कार्य का श्रेय संगठन के कार्यकर्ताओं के समर्पण को दिया। इस वर्ष आयोजन की व्यवस्थाओं में जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश, डॉ. धीर जी, विपिन गुप्ता, प्रदीप मौर्य, सोनू मिश्रा, दुर्गेश श्रीवास्तव, सचिन, आलोक शर्मा और जावेद अंसारी समेत अन्य सदस्यों ने सुबह से योगदान दिया।