
करीब एक किलोमीटर सड़क खराब, शासन से स्वीकृति न मिलने की बात; जांच के दौरान अधिकारियों के कथित मौखिक जवाब पर भी उठे सवाल
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। ग्राम पंचायत चकीदी, पोस्ट कोईलाड़ी बुजुर्ग, विकास खंड मुहम्मदपुर, तहसील निजामाबाद निवासी शिकायतकर्ता रमेश सरोज ने आवंक बाजार से ग्राम पंचायत चकीदी तक जाने वाली लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क की स्थिति और निर्माण/मरम्मत कार्य को लेकर शिकायत की थी। शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर सड़क की जांच की।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग के पत्रांक संख्या 13671 के आधार पर हुई जांच में सड़क की स्थिति को लेकर कई तथ्य सामने आए। शिकायत में करीब एक किलोमीटर सड़क पर कार्य किए जाने का उल्लेख था, जबकि शिकायतकर्ता ने करीब 900 मीटर हिस्से में कार्य न होने का मुद्दा उठाया था।

जांच के दौरान विभागीय अधिकारियों की ओर से बताया गया कि संबंधित सड़क की कुल लंबाई लगभग 1466 मीटर है। इसमें करीब एक किलोमीटर हिस्सा खराब स्थिति में बताया गया, लेकिन इस हिस्से के लिए फिलहाल शासन स्तर से स्वीकृति उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
₹3,000 की स्वीकृति बताए जाने पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता रमेश सरोज का कहना है कि जांच के दौरान अधिकारियों ने मौखिक रूप से यह भी बताया कि संबंधित सड़क के लिए शासन स्तर से केवल ₹3,000 की स्वीकृति प्राप्त हुई थी। इस कथित जानकारी के बाद शिकायतकर्ता ने विभाग से पूरे मामले का लिखित और प्रमाणित विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
उन्होंने स्वीकृति राशि, प्रस्तावित लागत, कार्यादेश, भुगतान, कराए गए कार्य तथा सड़क की वास्तविक स्थिति से संबंधित अभिलेख सार्वजनिक किए जाने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सड़क के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत हुई, कितना कार्य कराया गया और कितना भुगतान हुआ।
जांच प्रक्रिया और कथित व्यवहार पर भी आपत्ति
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उनसे कथित तौर पर कहा गया कि “आप सक्षम हैं तो शासन में शिकायत करिए, आप यहां शिकायत क्यों कर रहे हैं।” रमेश सरोज ने इस कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी शिकायत के संबंध में संबंधित विभाग से तथ्यात्मक जवाब और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा रखने का अधिकार है।
उन्होंने मांग की है कि सड़क निर्माण/मरम्मत से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच कर स्वीकृत धनराशि, कार्य की वास्तविक प्रगति और भुगतान का स्पष्ट ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही जांच प्रक्रिया और अधिकारियों द्वारा दिए गए कथित मौखिक जवाब की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि लिखित अभिलेख सामने आने के बाद ही सड़क की खराब स्थिति, स्वीकृति और कराए गए कार्य की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।