

गिरजाघर चौराहा स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क के सुंदरीकरण को लेकर जिलाधिकारी को भेजा पत्र, नगर पालिका ने बताईं शर्तें और पूरे मामले की स्थिति
24 सितंबर को हुआ स्थलीय निरीक्षण, 8 मई के अनापत्ति पत्र के आधार पर चल रहा था सुंदरीकरण कार्य; नगर पालिका ने कहा—विवेकानंद पार्क के अभिलेखों में स्थल दर्ज, प्रतिमा की स्थिति खराब होने पर नई बड़ी प्रतिमा लगाने का निर्णय
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। गिरजाघर चौराहा स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क में प्रतिमा और सुंदरीकरण को लेकर उठ रहे विवाद के बीच नगर पालिका परिषद आजमगढ़ ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की ओर से जिलाधिकारी आजमगढ़ को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पार्क के सुंदरीकरण का कार्य पूर्व में जारी अनापत्ति पत्र के क्रम में कराया जा रहा था और इसमें किसी प्रकार के सरकारी धन का उपयोग नहीं किया गया है। कार्य संबंधित संस्था द्वारा अपने संसाधनों से कराया जा रहा है।
पत्र के मुताबिक, नव जागृति सेवा संस्थान, आजमगढ़ की ओर से स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा को वर्तमान स्थिति से अधिक ऊंचाई पर स्थापित कराने संबंधी प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद मामले में नगर पालिका स्तर से निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की गई।

24 सितंबर को हुआ स्थलीय निरीक्षण
नगर पालिका के पत्र में बताया गया है कि विभिन्न सामाजिक संगठनों से प्राप्त शिकायतों के क्रम में 24 सितंबर 2026 को भौतिक निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण में पाया गया कि गिरजाघर चौराहा स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क के सुंदरीकरण का कार्य पूर्व में जारी अनापत्ति पत्र के क्रम में कराया जा रहा था।
नगर पालिका के अनुसार, संबंधित कार्य के लिए 8 मई 2026 को तत्कालीन अधिशासी अधिकारी/उपजिलाधिकारी (न्यायिक) द्वारा अनापत्ति पत्र जारी किया गया था। इसी के आधार पर प्रस्तावित स्थल पर कार्य की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी।

प्रतिमा को नुकसान न पहुंचे, इसकी शर्त
नगर पालिका ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि पार्क के निर्धारित क्षेत्र में बिना किसी प्रकार की क्षति पहुंचाए स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा का सुंदरीकरण कराया जाना था। सुंदरीकरण पर आने वाला खर्च संबंधित संस्था द्वारा वहन किया जाना था।
साथ ही यह भी शर्त रखी गई थी कि यदि यातायात में किसी प्रकार की बाधा या व्यवधान उत्पन्न होता है तो वहां सुंदरीकरण कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। पार्क के चारों ओर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित संस्था की बताई गई थी।
विवाद की स्थिति में नगर पालिका का निर्णय अंतिम
पत्र में यह भी कहा गया है कि किसी विवाद की स्थिति में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का निर्णय अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होगा। संबंधित कार्य के दौरान जनसुरक्षा और संभावित दुर्घटनाओं से बचाव की पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी।
मौजूदा प्रतिमा खराब, अब लगेगी बड़ी प्रतिमा
नगर पालिका ने पत्र में मौजूदा प्रतिमा की स्थिति को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पत्र के अनुसार, पूर्व में नगर पालिका परिषद आजमगढ़ की निधि से स्थापित स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा वर्तमान में सही स्थिति में नहीं है और जगह-जगह से खराब हो रही है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित स्थल पर स्थापित नवीन प्रतिमा मौजूदा प्रतिमा से छोटी है।
इसी को देखते हुए नगर पालिका परिषद ने स्वामी विवेकानंद जी की एक बड़ी प्रतिमा स्थापित कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रतिमा निर्माताओं से बातचीत किए जाने की बात भी पत्र में कही गई है।
पार्क के नाम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट
गिरजाघर चौराहे के नाम को लेकर उठे सवालों के संबंध में नगर पालिका ने अपने अभिलेखों का हवाला देते हुए कहा है कि संबंधित स्थल के अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि पार्क का नाम स्वामी विवेकानंद पार्क से अंकित है।
सरकारी धन खर्च नहीं होने का दावा
नगर पालिका के पत्र का सबसे अहम पक्ष यह है कि वर्तमान सुंदरीकरण कार्य में नगर पालिका द्वारा किसी प्रकार के सरकारी धन का उपयोग नहीं किया गया है। पत्र के मुताबिक, जारी अनापत्ति के क्रम में संबंधित संस्था द्वारा अपने स्वयं के संसाधनों से सुंदरीकरण कराया जा रहा है।
नगर पालिका ने पूरे मामले से जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए पत्र की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है।
अब इस पत्र के सामने आने के बाद स्वामी विवेकानंद पार्क में प्रतिमा और सुंदरीकरण को लेकर चल रहे विवाद में नगर पालिका का पक्ष सामने आ गया है। नगर पालिका ने जहां मौजूदा प्रतिमा की खराब स्थिति का हवाला देते हुए बड़ी प्रतिमा लगाने की बात कही है, वहीं सुंदरीकरण कार्य में सरकारी धन खर्च होने की बात को भी स्पष्ट रूप से खारिज किया है।