हरिहरपुर कजरी महोत्सव में गूंजे कजरी के सुर, लोक संस्कृति से सराबोर हुआ हरिहरपुर

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‘बरसन लागी सावन बुंदिया राजा’ से लेकर ‘मिर्जापुर कईला गुलजार’ तक कलाकारों ने बांधा समां, देर तक झूमते रहे श्रोता

हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। हरिहरपुर की धरती पर सोमवार को कजरी और लोक संगीत के सुरों ने ऐसा रंग जमाया कि पूरा माहौल लोक संस्कृति से सराबोर हो उठा। हरिहरपुर संगीत घराना ट्रस्ट एवं हरिहरपुर घराना संगीत संस्थान के तत्वावधान में हरिहरपुर संगीत अकादमी परिसर में दो दिवसीय हरिहरपुर कजरी महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों पर श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे।


महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत गायक अभिषेक मिश्र की गणेश वंदना ‘गजानंद राखे लाज हमारी…’ से हुई। इसके बाद ‘धन्य है ये धरा, धन्य है आज हम…’, कजरी ‘बरसन लागी सावन बुंदिया राजा’ और सूफी गीत ‘सांसों की माला पे’ ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
भजन गायक उमेश सिंह राठौर ने ‘लगन तुमसे लगा बैठे’ और ‘कहियो दर्शन दीहे हो…’ प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं गायिका सपना बनर्जी ने ‘देखो सांवरे के संग गोरी झूले हिंडोला…’, ‘बीरन भईया अइहैं अनवईया हो, सवनवा में ना जइबे ननदी’ और ‘हमरी अटरिया पे आजा रे सांवरिया’ जैसे गीतों से खूब वाहवाही बटोरी।
इसके बाद अनिल मिश्रा ने ‘दुनिया में देवो हजारों, बजरंगबली का क्या कहना’ और कजरी ‘हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया’ से महफिल में रंग भर दिया। आदर्श मिश्र की ‘सइयां मिले लड़कइया, मैं क्या करूं’, ‘रेलिया बैरंग पिया को लिये जाए रे’ और ‘दोस्त इस जमाने को क्या हो गया…’ जैसी प्रस्तुतियों पर जमकर तालियां बजीं।


हृदय मिश्र ने ‘आयो चाहे जो हो सवना’, ‘मिर्जापुर कईला गुलजार हो, कचैड़ी गली सूं कईला बलमू’ और ‘गोरिया झूला झुलाने अपना…’ से समां बांध दिया। वहीं नितीश मिश्र की कजरी ‘दरोगा जी हो, चार दिन से पियवा बा लापता’ और ‘अइहा ललनवा घर दुश्मन के मार के’ ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
संगत ने बढ़ाई प्रस्तुतियों की चमक
विशाल एंड ग्रुप की म्यूजिक टीम ने भी अपनी शानदार संगत से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। बोर्ड पर बादल मिश्र, तबले पर विशाल मिश्र व अभिषेक मिश्र तथा ऑटो पैड पर संदीप मिश्र ने कलाकारों का साथ दिया।
तीन दशक से लोक परंपरा को सहेजने की कोशिश
हरिहरपुर कजरी महोत्सव की खासियत यह है कि करीब 30 वर्षों से लोक संगीत और कजरी की परंपरा को जीवंत रखने का प्रयास किया जा रहा है। संस्था प्रमुख एवं कार्यक्रम व्यवस्थापक अजय मिश्र अपने परिश्रम और लगन से इस आयोजन को आगे बढ़ाते रहे हैं। स्वास्थ्य कारणों से इस वर्ष महोत्सव सितंबर में आयोजित किया गया।
अजय मिश्र ने कहा कि हरिहरपुर की पारंपरिक कजरी और लोक संगीत को देश ही नहीं, बल्कि विश्व पटल तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों का निरंतर होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोक विधाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने और कलाकारों को मंच देने में महोत्सव महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
‘संसाधन सीमित हो सकते हैं, संगीत की परंपरा नहीं’
मुख्य अतिथि विजय बहादुर पाठक ने कहा कि कलाकार सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी संगीत परंपरा को नहीं छोड़ता। जीवन में कोई व्यक्ति हमेशा पूरी तरह सफल नहीं रहता, लेकिन परिस्थितियां चाहे जैसी हों, निरंतर आगे बढ़ते रहना ही उसकी महानता है। उन्होंने कजरी और लोक संगीत जैसी पारंपरिक विधाओं को संरक्षित करने के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रस्तुतियों के दौरान दर्शक भाव-विभोर नजर आए और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे। संचालन कमलेश मिश्र ने किया और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर अजय मिश्र, आदर्श मिश्र, दीपक मिश्र, नितीश मिश्र, राहुल मिश्र, विशाल मिश्र, संदीप मिश्र सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी मौजूद रहे।

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