हरिऔध कला केन्द्र के ऑडिटोरियम एवं हॉल की किराया दरें निर्धारित, तत्काल प्रभाव से होंगी लागू

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पर्यटन विकास कार्यों की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के डीएम ने दिये निर्देश

हरिऔध कला केन्द्र को शासनानुसार पीपीपी मोड पर संचालित किये जाने पर दिया गया बल

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद की बैठक सम्पन्न

आजमगढ़। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद, आजमगढ़ की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जनपद में पर्यटन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार, पर्यटन स्थलों के विकास, हरिऔध कला केन्द्र के प्रभावी संचालन तथा विभिन्न निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में वर्तमान में जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित हरिऔध कला केन्द्र के संबंध में शासन की मंशा के अनुरूप इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर संचालित किये जाने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से कला केन्द्र का बेहतर प्रबंधन, रखरखाव तथा सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे जनपद की सांस्कृतिक पहचान को नई गति मिलेगी।

बैठक में हरिऔध कला केन्द्र में निर्मित 444 सीट क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम तथा भू-तल पर स्थित पूर्वी हॉल (रसोई सहित) के उपयोग हेतु किराया दरों का निर्धारण भी किया गया। निर्णय के अनुसार ऑडिटोरियम का किराया 30,000 रुपये तथा 18 प्रतिशत जीएसटी सहित कुल 35,400 रुपये निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार पूर्वी हॉल (रसोई सहित) का एक दिन का किराया 10,000 रुपये तथा 18 प्रतिशत जीएसटी सहित कुल 11,800 रुपये निर्धारित किया गया है। यह दरें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। जनपदवासी, विभिन्न संस्थान/संस्थाएं, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन तथा निजी प्रतिष्ठान अपने कार्यक्रम, संगोष्ठी, सम्मेलन, सांस्कृतिक आयोजन एवं अन्य समारोहों के लिए हरिऔध कला केन्द्र स्थित जिला पर्यटन कार्यालय से संपर्क कर ऑडिटोरियम एवं हॉल की बुकिंग करा सकते हैं। उन्होंने हरिऔध कला केन्द्र में ऊर्जा संरक्षण एवं संचालन व्यय में कमी लाने के उद्देश्य से सोलर प्लांट स्थापित किये जाने पर भी विशेष बल दिया।

बैठक में जनपद में संचालित पर्यटन विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि सभी निर्माणाधीन पर्यटन स्थलों का नियमित स्थलीय निरीक्षण किया जाए। निरीक्षण के दौरान संबंधित स्थल की भौगोलिक स्थिति, विकास खण्ड एवं तहसील का स्पष्ट उल्लेख किया जाए तथा प्रत्येक परियोजना की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ समयसीमा के भीतर पूर्ण कराये जाएं, जिससे जनपद के पर्यटन विकास को गति मिल सके।

जिलाधिकारी ने शासन की उस योजना की भी समीक्षा की जिसके अंतर्गत 100 वर्ष या उससे अधिक पुराने मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं, कुण्डों एवं अन्य धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार का प्रावधान है। उन्होंने निर्देशित किया कि प्राप्त सभी प्रस्तावों का प्राथमिकता के आधार पर स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। यदि संबंधित स्थल पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो तथा कोई प्रतिकूल तथ्य न हो, तो कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, प्रखण्ड आजमगढ़ के माध्यम से तत्काल आगणन तैयार कराकर शासन को अग्रसारित किया जाए, ताकि पात्र स्थलों का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जा सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना, मुख्य कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव, जिला पर्यटन सूचना अधिकारी नवीन सिंह, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग संकर्षण लाल, अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोदी, परिषद के सदस्य ऋषिकांत राय सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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