
किसान संगठनों का विरोध, बोले—कॉरपोरेट का 3.20 लाख करोड़ माफ, किसान की जमीन कुर्की नहीं होगी बर्दाश्त
हिंदी न्यूज़ 24
आजमगढ़। फूलपुर तहसील क्षेत्र के खंडोरा गांव निवासी किसान मेवालाल की जमीन किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के कर्ज के चलते कुर्क किए जाने और 15 दिन में कर्ज जमा न करने पर खेत की नीलामी की चेतावनी दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा ने कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए इसे सरकार की किसान विरोधी और अमानवीय नीति करार दिया है।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मेवालाल की जमीन की कुर्की तत्काल वापस नहीं ली गई तो फूलपुर तहसील से लेकर पूरे पूर्वांचल में जन अभियान चलाया जाएगा। संगठनों ने कहा कि किसानों की जमीन बचाने और कर्जमाफी की मांग को लेकर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
कॉरपोरेट का कर्ज माफ, किसान की जमीन कुर्क क्यों?
पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव और सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने पूंजीपतियों का 3 लाख 20 हजार करोड़ रुपये बट्टे खाते में डालकर माफ कर दिया, जबकि एक गरीब किसान की करीब डेढ़ लाख रुपये की देनदारी के लिए उसकी जमीन कुर्क की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण है।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि एक ओर बड़े कॉरपोरेट घरानों को कर्ज राहत दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे और सीमांत किसानों पर कर्ज वसूली के लिए जमीन कुर्क और नीलामी की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे किसान विरोधी नीति बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
2007 में लिया था 1.50 लाख का केसीसी लोन
किसान संगठनों के मुताबिक ग्राम सभा खंडोरा निवासी मेवालाल ने वर्ष 2007 में किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। खेती में लगातार नुकसान, बाढ़-सूखा और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण वह कर्ज की अदायगी नहीं कर सके।
आरोप है कि 6 अक्टूबर 2026 को बैंक कर्मचारियों और फूलपुर तहसील के राजस्व कर्मियों ने किसान के घर पहुंचकर उसके खेत के चारों ओर लाल झंडी लगाकर जमीन कुर्क कर दी। इसके साथ ही किसान को नोटिस देकर चेतावनी दी गई कि 15 दिन के भीतर कर्ज जमा नहीं किया गया तो खेत की नीलामी कर दी जाएगी।
किसानों के केसीसी ऋण की एकमुश्त माफी की मांग
किसान संगठनों ने मांग की है कि मेवालाल की जमीन की कुर्की तत्काल रद्द की जाए और उसका कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए। नीलामी संबंधी नोटिस वापस लिया जाए। साथ ही सरकार छोटे और सीमांत किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े ऋण की एकमुश्त कर्जमाफी की घोषणा करे।
उन्होंने कहा कि जब तक किसानों के लिए स्थायी कर्जमाफी नीति नहीं बनती, तब तक किसानों की जमीन की कुर्की और नीलामी पर पूरी तरह रोक लगाई जानी चाहिए।
किसान नेताओं ने चेताया कि मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को फूलपुर से पूरे पूर्वांचल तक विस्तार दिया जाएगा।